एक अदद सुगम सड़क के लिए तरस रहे राजस्व गांव उरमाल के 13 टोला के ग्रामीण

चांडिल, 09 जुलाई : हम यायावर नहीं है साहब, घुमंतु समाज के लोग भी नहीं कि कुछ दिनों के लिए यहां डेरा डाले बैठे हैं. हम यहां के मूल निवासी है. सरकार हम से वोट लेती है. लेकिन सुविधाएं देने के समय हमे भूल जाती हैं. चुनाव के दौरान सभी पहुंचते हैं लेकिन चुनाव जीत कर विधायक-सांसद बनने के बाद वे लोग हमारी तरफ मुड़कर देखना भी मुनासिब नहीं समझते हैं. यह व्यथा सरायकेला-खरसावां जिला अंतर्गत चांडिल प्रखंड के राजस्व गांव उरमाल के चार टोला में रहने वाले ग्रामीणों का है. मिली जानकारी के अनुसार उरमाल गांव के कुल 13 टोला उरमाल, बुरुडीह, गेरियाकोचा, भुचुंगडीह, बिद्री, हाथीकोचा, गितिलबेड़ा, तालाटोला, लावाटोला आसंगीबेड़ा, महादेवबेड़ा, चिरुटोला और शोखाडीह में आवागमन के लिए सुगत सड़क तक नहीं है.
बरसात में बढ़ जाती परेशानी
उरमाल गांव के 13 टोला में रहने वाले ग्रामीणों की सबसे बड़ी समस्या आवागमन के लिए सुगम सड़क की है. टाटा-रांची एनएच 33 से इन टोलाें तक जाने वाली पहुंच पथ खस्ताहाल है. इससे ग्रामीणों की परेशानी बरसात के दौरान बढ़ जाती है. सड़क पर जगह-जगह कीचड़ से सने गड्ढे बन गए है. किसी काम से गांव से बाहर निकलने में ग्रामीणों को कीचड़ से सने रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है. बरसात में ग्रामीण जरूरत पड़ने पर ही बसीर निकलते है, लेकिन स्कूल-कॉलेज में पढ़ने वाले विद्यार्थी और रोजगार के लिए रोज घर से बाहर जाने वालों के लिए सड़क परेशानी का सबब बन गया है. गांव की सड़क के खस्ताहाल और इस मामले में ग्रामीणों की उपेक्षा से लोगों में नाराजगी के साथ-साथ रोष भी व्याप्त है. इसके लिए ग्रामीण जनप्रतिनिधियों को जिम्मेवार ठहरा रहे हैं.

आईएपी योजना से बनी थी सड़क
एनए 33 पर चांडिल प्रखंड क्षेत्र के उरमाल से आसंगीबेड़ा की ओर 4.7 किलोमीटर तक सड़क का निर्माण वित्तीय वर्ष 2011-12 में कराया गया है. उस समय इस क्षेत्र को घोर उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया था. नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में एकीकृत कार्य योजना (आईएपी) से बनने वाली सड़कों के तहत इस सड़क का भी निर्माण कराया गया था. इसके बाद सड़क का मरम्मत भी नहीं हुआ है. 14 वर्षों के अंतराल में सड़क बद से बदत्तर होता गया. इस संबंध में पंचायत के मुखिया भीमसिंह मुंडा ने बताया कि कई बार सड़क निर्माण के लिए आवेदन दिया गया है, लेकिन इस दिशा में अबतक किसी प्रकार का सकारात्मक पहल नहीं हुआ है. उन्होंने बताया कि मुखिया निधि से कई स्थानों में पीसीसी सड़क का निर्माण कराया गया है ताकि लोगों को आवागमन में सहुलियत हो सके.



