झारखंड आंदोलनकारी लक्ष्मीकांत महतो का निधन, क्षेत्र में शोक की लहर

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झारखंड आंदोलनकारी लक्ष्मीकांत महतो का निधन, क्षेत्र में शोक की लहर

पटमदा, 1 अक्टूबर : पूर्वी सिंहभूम जिले के पटमदा प्रखंड अंतर्गत गेंगड़ा निवासी झारखंड आंदोलनकारी लक्ष्मीकांत महतो का गुरुवार को 78 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे पटमदा क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। वे अपने पीछे दो पुत्र, एक पुत्री, दो पुत्रवधू और तीन पोते समेत भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।

लक्ष्मीकांत महतो के निधन की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में झारखंड आंदोलन से जुड़े लोग और ग्रामीण उनके आवास पहुंचे तथा उन्हें श्रद्धांजलि दी। आंदोलनकारियों ने उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि झारखंड आंदोलन के दौरान उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई थी।

बताया जाता है कि शहीद निर्मल महतो की शहादत के बाद लक्ष्मीकांत महतो काफी आक्रोशित हुए और इसके बाद झारखंड मुक्ति मोर्चा से जुड़कर झारखंड आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल हो गए। उन्होंने आंदोलन को मजबूत करने के लिए कई आंदोलनों में हिस्सा लिया। इस दौरान वे दिशोम गुरु शिबू सोरेन, चंपई सोरेन, सुरेंद्र महतो, सुधीर महतो, मनोज महतो, डमन सिंह मुंडा, दुर्योधन महतो और मनमोद महतो समेत अन्य आंदोलनकारियों के साथ आंदोलन को धार देने में जुटे रहे।

गुरुवार को गेंगड़ा स्थित पैतृक गांव के श्मशान घाट पर पूरे सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण और झारखंड आंदोलन से जुड़े लोग शामिल हुए।

इस मौके पर रामनाथ महतो, शंकर महतो, भुकू महतो, जयराम महतो, शक्तिपदा महतो, मड़ीराम प्रामाणिक, बुधेश्वर महतो, पवित्र महतो, मदन महतो, मितन महतो, भोलानाथ महतो, जनार्दन सिंह, आदित्य आचार्य, शंकर महतो, जनार्दन सिंहदेव समेत हजारों की संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

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