नेहा बोरा पर स्याही फेंके जाने की घटना की झारखंड जनाधिकार महासभा ने की निंदा, JPSC आंदोलन को लेकर छात्रों से सतर्क रहने की अपील

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नेहा बोरा पर स्याही फेंके जाने की घटना की झारखंड जनाधिकार महासभा ने की निंदा, JPSC आंदोलन को लेकर छात्रों से सतर्क रहने की अपील

रांची, 08 अगस्त : झारखंड जनाधिकार महासभा ने 7 अगस्त को विधानसभा मार्च के दौरान जंतर-मंतर आंदोलनकारी और AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा पर स्याही फेंके जाने की घटना की कड़ी निंदा की है। महासभा का आरोप है कि स्याही फेंकने वाला व्यक्ति आरएसएस से जुड़ा हुआ था और घटना के दौरान उसने ‘जय श्री राम’ का नारा भी लगाया।

महासभा ने शनिवार को जारी प्रेस वक्तव्य में कहा कि इस तरह की घटनाएं झारखंड के छात्र-युवाओं की एकता को कमजोर करने और JPSC आंदोलन को कथित तौर पर राजनीतिक दिशा देने की कोशिश का हिस्सा हैं। संगठन ने आरोप लगाया कि भाजपा-आरएसएस और उनसे जुड़े मीडिया के माध्यम से छात्र-युवा आंदोलनों के बीच विभाजन पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है।

महासभा ने कहा कि वह जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में चल रहे छात्र-युवाओं के JPSC आंदोलन के समर्थन में शुरू से रही है और उसके कई सदस्य आंदोलन में शामिल हैं। संगठन के अनुसार, 14वीं JPSC परीक्षा को लेकर सामने आए तथ्यों से व्यापक गड़बड़ी और कथित घोटाले के सवाल उठे हैं। महासभा ने कहा कि सरकारी नियुक्तियों में अनियमितताओं को लेकर झारखंड के छात्र-युवाओं में अपने भविष्य को लेकर चिंता है और इसी वजह से वे अलग-अलग स्तर पर आंदोलन कर रहे हैं।

प्रेस वक्तव्य में महासभा ने कहा कि अलग-अलग स्थानों पर चल रहे छात्र-युवा आंदोलनों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा करना उचित नहीं है। संगठन का कहना है कि जंतर-मंतर का राष्ट्रीय आंदोलन हो या झारखंड में चल रहा JPSC आंदोलन, दोनों का उद्देश्य छात्र-युवाओं के हितों से जुड़ा है और इनके बीच विभाजन पैदा करना आंदोलन की एकता के लिए नुकसानदेह है।

महासभा ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग JPSC आंदोलन को सही और जंतर-मंतर आंदोलन को गलत बताकर दोनों आंदोलनों के बीच मतभेद पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। संगठन के मुताबिक, इस तरह की बयानबाजी भाजपा की राजनीति से मेल खाती है और इससे छात्र-युवा आंदोलन को दलीय राजनीति के दायरे में सीमित करने का खतरा है।

संगठन ने JPSC आंदोलन से जुड़े छात्र-युवाओं से अपील की है कि वे भाजपा और आरएसएस से दूरी बनाए रखें तथा उनके कथित राजनीतिक नैरेटिव का हिस्सा न बनें। महासभा ने उम्मीद जताई कि JPSC आंदोलन आगे चलकर व्यापक जन आंदोलन का रूप लेगा और इससे राज्य की शिक्षा तथा सरकारी नियुक्ति व्यवस्था में सुधार की दिशा में दबाव बनेगा।

वहीं, महासभा ने राज्य सरकार से आंदोलनरत छात्रों के साथ ईमानदारी से वार्ता करने और उनकी मांगों पर सकारात्मक एवं त्वरित कार्रवाई करने की मांग की है।

महासभा की ओर से जारी वक्तव्य में कहा गया है कि छात्र-युवा आंदोलनों की एकता बनाए रखना जरूरी है और सरकारी नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा सुधार के लिए व्यापक स्तर पर पहल की आवश्यकता है।

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