कोलाबिरा में हाइवा की टक्कर से महिला की मौत, आक्रोशित ग्रामीणों ने किया सड़क जाम

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कोलाबिरा में हाइवा की टक्कर से महिला की मौत, आक्रोशित ग्रामीणों ने किया सड़क जाम

सरायकेला, 22 जून : जिले में सड़क हादसों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार तड़के सरायकेला थाना क्षेत्र अंतर्गत कोलाबिरा के पास एक तेज रफ्तार हाइवा की चपेट में आने से बाइक सवार महिला की मौत हो गई, जबकि एक अन्य व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने शव को सड़क पर रखकर जाम लगा दिया और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

प्राप्त जानकारी के अनुसार रापचा निवासी फुलसरी महतो और हाथीटांड़ निवासी शंभू चरण महतो बाइक से कदमा से दुगनी दवा लेने जा रहे थे। इसी दौरान कोलाबिरा के समीप पीछे से आ रही तेज रफ्तार हाइवा ने उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में फुलसरी महतो की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि शंभू चरण महतो गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों की मदद से घायल को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया।

हादसे के बाद हाइवा चालक वाहन लेकर फरार होने की कोशिश करने लगा। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों और राहगीरों ने उसका पीछा किया और दुगनी क्षेत्र में हाइवा को पकड़ लिया। इसके बाद चालक को पुलिस के हवाले कर दिया गया।

घटना से गुस्साए ग्रामीणों ने मृतका के शव को सड़क पर रखकर जाम लगा दिया। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया। ग्रामीणों ने मौके पर वरीय प्रशासनिक अधिकारियों को बुलाने, मृतका के आश्रितों को उचित मुआवजा देने, दोषी चालक के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने तथा भारी वाहनों की तेज रफ्तार पर रोक लगाने की मांग की।

सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों को समझाने-बुझाने का प्रयास शुरू किया। समाचार लिखे जाने तक जाम हटाने की कवायद जारी थी।

जिले में बीते 24 घंटे के भीतर यह तीसरी बड़ी सड़क दुर्घटना है, जिसमें लोगों की जान गई है। इससे पहले आदित्यपुर, कांड्रा और सरायकेला थाना क्षेत्रों में हुए अलग-अलग सड़क हादसों में तीन लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं हाल ही में कोलाबिरा के मोहिउद्दीनपुर क्षेत्र में भी एक महिला की सड़क दुर्घटना में जान चली गई थी।

लगातार हो रहे सड़क हादसों ने जिले की यातायात व्यवस्था और सड़क सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन द्वारा समय-समय पर सड़क सुरक्षा संबंधी बैठकें आयोजित की जाती हैं, लेकिन सड़कों पर तेज रफ्तार और ओवरलोड वाहनों की आवाजाही पर प्रभावी नियंत्रण नहीं दिख रहा है। लगातार बढ़ती दुर्घटनाएं प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को उजागर कर रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि भारी वाहनों की गति पर नियंत्रण और नियमित जांच अभियान नहीं चलाए गए तो ऐसे हादसे आगे भी जारी रह सकते हैं।

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