चांडिल अंचल में जमीन मापी को लेकर ग्रामीणों का विरोध, अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
ग्रामीणों ने कहा- बिना ग्रामसभा और पंचायत को सूचना दिए कैसे शुरू हो सकती है मापी प्रक्रिया?

चांडिल , विशेष रिपोर्ट,6 जुलाई : सरायकेला – खरसावां जिले के चांडिल अंचल अंतर्गत मौजा आसनबनी, खाता संख्या 460, प्लॉट संख्या 1395 में सरकारी भूमि की मापी को लेकर शनिवार को ग्रामीणों और अंचल प्रशासन के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। मौके पर पहुंचे चांडिल अंचल के मापक को ग्रामीणों ने मापी कार्य शुरू करने से रोक दिया और जमकर विरोध दर्ज कराया।
बिना लिखित आदेश के कैसे हो रही मापी?
ग्रामीणों ने मापक से जब मापी आदेश की प्रति मांगी तो उन्होंने बताया कि उन्हें मौखिक रूप से आदेश दिया गया है। इस पर ग्रामीण आक्रोशित हो उठे और कहा कि सरकारी कामकाज में मनमानी नहीं चलेगी। बिना लिखित आदेश, ग्रामसभा की जानकारी, वार्ड सदस्य और पंचायत को सूचना दिए बगैर किसी भी प्रकार की मापी को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
ग्रामसभा और पंचायत की अनदेखी पर नाराज ग्रामीण
ग्रामीणों ने कहा कि न तो ग्रामसभा को इसकी सूचना दी गई, न ही संबंधित वार्ड सदस्य और पंचायत प्रतिनिधियों को। यह पूरी प्रक्रिया ग्रामीण लोकतंत्र और पंचायत राज व्यवस्था का सीधा उल्लंघन है। उनका कहना है कि यह कार्य स्थानीय जमीन दलालों और कुछ प्रभावशाली लोगों के दबाव में किया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों की सरकारी जमीन पर अधिकार खतरे में पड़ सकता है।
अंचल कार्यालय की संदिग्ध भूमिका
इस घटनाक्रम ने चांडिल अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर सरकारी भूमि के मामलों में पारदर्शिता और पंचायत की सहभागिता की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर चुपचाप “मौखिक आदेश” के नाम पर मापी कराना प्रशासन की भूमिका पर संदेह पैदा करता है।
ग्रामीणों की मांग – नियमानुसार हो कार्रवाई
ग्रामीणों ने स्पष्ट रूप से कहा कि जब तक विधिवत लिखित आदेश, पंचायत प्रतिनिधियों की उपस्थिति और ग्रामसभा की स्वीकृति नहीं होगी, तब तक किसी प्रकार की मापी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जबरदस्ती मापी का प्रयास किया तो व्यापक आंदोलन किया जाएगा।
प्रशासन जवाब दे:
आखिर किसके निर्देश पर मौखिक आदेश देकर मापी कराई जा रही थी?
क्यों पंचायत और ग्रामसभा को अंधेरे में रखकर काम किया जा रहा है?
क्या चांडिल अंचल कार्यालय किसी दबाव में कार्य कर रहा है? इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर अंचल कार्यालयों में पारदर्शिता की कमी और स्थानीय स्वशासन संस्थाओं की उपेक्षा की ओर ध्यान आकर्षित किया है। ज़रूरत है कि जिला प्रशासन इस पर संज्ञान ले और मामले की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई सुनिश्चित करे।
इधर, सूत्रों की मानें तो अंचल कार्यालय का दावा है कि उक्त जमीन से जुड़े लोगों और स्थानीय ग्रामसभा को नोटिस जारी किया था। हालांकि, अबतक इस बात की पुष्टि नहीं हो सकी है, कि अंचल कार्यालय द्वारा जारी किया गया नोटिस सम्बंधित लोगों तक पहुंचा है अथवा नहीं। जब ग्रामीणों द्वारा मापक से लिखित आदेश की प्रति मांगी गई तो उन्होंने आदेश पत्र दिखाने में असमर्थता जताई थी, जिससे पूरा मामला संदेहास्पद बन गया है।



