टाटा-रांची टोल रोड़ पर बंद पड़े शौचालयों ने खोली NHAI के सुविधाओं की पोल

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टाटा-रांची टोल रोड़ पर बंद पड़े शौचालयों ने खोली NHAI के सुविधाओं की पोल

चांडिल, 22 मई : टोल टैक्स के नाम पर वाहनों से करोड़ों की वसूली, लेकिन यात्रियों को शौचालय तक नसीब नहीं; चांडिल क्षेत्र में बने तीनों सुविधा केंद्रों पर लटके मिले ताले। जी हां, टाटा-रांची फोरलेन टोल रोड़ पर वाहन चालकों को सुविधाओं नाम पर कुछ भी नही मिलता है। टाटा-रांची राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों से टोल टैक्स की वसूली तो बेधड़क जारी है, लेकिन यात्रियों और वाहन चालकों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह भगवान भरोसे हैं। स्थानीय लोगों और वाहन चालकों का आरोप है कि एनएचआई केवल राजस्व वसूली पर ध्यान दे रहा है, जबकि यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा उसके लिए प्राथमिकता नहीं रह गई है।

रांची से लेकर पूर्वी सिंहभूम जिले के अंतिम छोर तक इस मार्ग पर कुल चार टोल प्लाजा संचालित हैं, जहां प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहनों से निर्धारित शुल्क वसूला जाता है। इसके बावजूद NHAI यानि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यात्रियों को न्यूनतम सुविधाएं उपलब्ध कराने में भी विफल साबित हो रहा है। सवाल यह उठता है कि जब यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं, तो आखिर उनसे भारी-भरकम टोल टैक्स किस बात का लिया जा रहा है? आज भी चालक और यात्री शौचालय के लिए पेट्रोल पंपों और होटलों पर निर्भर रहने को मजबूर हैं।

मानभूम अपडेट्स की टीम ने सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल क्षेत्र में टाटा-रांची राष्ट्रीय राजमार्ग की जमीनी पड़ताल की। इस दौरान यह सामने आया कि एनएचआई द्वारा घोड़ानेगी, जरियाडीह और आसनबनी में वाहन चालकों एवं यात्रियों की सुविधा के लिए शौचालयों का निर्माण तो कराया गया है, लेकिन तीनों स्थानों पर शौचालयों में ताले लटके हुए हैं। यानी करोड़ों रुपये की लागत से बने ये सार्वजनिक सुविधा केंद्र केवल शोपीस बनकर रह गए हैं। सफेद हाथी साबित होती सुविधाओं के नाम पर बनी ये बंद शौचालय एनएचएआई पर गंभीर सवाल खड़ा कर रही है।

सबसे चौंकाने वाली स्थिति जरियाडीह में देखने को मिली। यहां शौचालय के लिए कराई गई बोरिंग में पानी का इतना अच्छा स्रोत है कि बिना मोटर और हैंडपंप के लगातार पानी निकलता रहता है। स्थानीय लोगों के अनुसार कई वाहन चालक यहां रुककर इसी पानी से स्नान करते हैं, लेकिन खुले में नहाने को मजबूर होने के कारण उन्हें शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है। यदि एनएचआई चाहे तो यहां बिना अतिरिक्त खर्च के शौचालय को नियमित रूप से संचालित किया जा सकता है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के कारण सुविधा शुरू नहीं हो पा रही है

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