जड़ों से जुड़ने का संकल्प बना सेंदरा पर्व, जामडीह में परंपरा के साथ जागी सांस्कृतिक चेतना

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चांडिल, 26 अप्रैल : बदलते समय और आधुनिकता के दौर में जहां पारंपरिक पहचान धीरे-धीरे कमजोर पड़ती जा रही है, वहीं चांडिल प्रखंड के आसनबनी पंचायत अंतर्गत जामडीह गांव में सेंदरा पर्व ने एक बार फिर लोगों को अपनी जड़ों से जुड़ने का संदेश दिया। दलमा बुरू सेंदरा देशुआ समिति के तत्वावधान में यह पर्व श्रद्धा, आस्था और सांस्कृतिक गौरव के साथ पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुरूप मनाया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत लाया देवेन कर्मकार द्वारा ईष्ट देवता की विधिवत पूजा-अर्चना से हुई, जिसके बाद पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल बन गया। पारंपरिक वेशभूषा और रीति-रिवाजों के साथ आयोजित इस पर्व ने आदिवासी समाज की समृद्ध विरासत को जीवंत कर दिया।

समिति के सचिव सत्य नारायण मुर्मू ने अपने संबोधन में सेंदरा पर्व को आदिवासी समाज की अस्मिता और पहचान का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। उन्होंने चिंता जताई कि आधुनिकता के प्रभाव में परंपराएं कमजोर हो रही हैं, ऐसे में सेंदरा जैसे पर्व हमारी जड़ों को मजबूत बनाए रखने का काम करते हैं।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि आज हम अपनी संस्कृति और परंपराओं की रक्षा नहीं करेंगे, तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी। उन्होंने युवाओं से आगे आकर अपनी विरासत को सहेजने और उसे आगे बढ़ाने की अपील की।

इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष फकीर चंद्र सोरेन, उपाध्यक्ष गुरु चरण सिंह, रामगढ़ ग्राम प्रधान कालीपोद सिंह, गणपति सिंह, फागू सोरेन, सत्य रंजन सोरेन, बृंदाबन सिंह, बलाई टुडू, सोम मांझी, सदानंद सिंह सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

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