स्वर्णरेखा नदी में लाखों मछलियों के मरने पर विधायक सरयू राय ने बाबूडीह और लालभट्ठा घाट का किया भ्रमण 

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जमशेदपुर, 02 अप्रैल : जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने गुरुवार को स्वर्णरेखा नदी के भुईंयाडीह के बाबूडीह और लालभट्ठा घाट का भ्रमण किया। यहां गत 31 मार्च को भीषण जलप्रदूषण के कारण लाखों मछलियां मर गईं थी। तीन दिन बाद भी नदी बड़ी संख्या में मरी हुई मछलियों से पटी हुई हैं। मरी हुई मछलियों में कीड़े लग रहे हैं। इनसे भीषण दुर्गंध आ रही है। नदी का पानी भी किनारे पर काले रंग का हो गया है। स्पष्ट है कि रिहायशी इलाकों एवं टाटा स्टील की फैक्ट्री से होकर नदी में गिरने वाले बड़े नालों का दूषित बहिस्राव नदी के प्रदूषण और मछलियों के मरने का कारण है। यह दूषित बहिस्राव टाटा स्टील की फैक्ट्री से निकला है या रिहायशी इलाकों में चलने वाली अवैध गतिविधियों से, यह जांच का विषय है।

सरयू राय ने बताया कि सरकारी क्षेत्र के तीन संगठन ऐसे हैं, जिनको इस बारे में गंभीर पहल करनी चाहिए। जिला के उपायुक्त, जो जिला पर्यावरण समिति के पदेन अध्यक्ष होते हैं।झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, जो जल संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण अधिनियम के अनुसार नदियों के प्रदूषण नियंत्रण का नियामक संगठन है, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने भी यह जिम्मेदारी सौंपी है।जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति, जिस पर शहरी प्रदूषित बहिस्राव को नियंत्रित करने और नदी किनारे का संरक्षण करने की जिम्मेदारी है। इन तीनों संगठनों ने बड़ी संख्या में मछलियों के मरने के बारे में क्या कदम उठाए हैं, इसकी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए।

श्री राय ने कहा कि उपरोक्त तीनों संगठनों में से सर्वाधिक गैर जिम्मेदार झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड है। एक तो इसमें पदाधिकारियों और वैज्ञानिकों की भारी कमी है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार, उद्योगों में ऑनलाइन कन्टीन्यूवस एनीशन मॉनेटरिंग सिस्टम स्थापित किया जाना है, जिसका सीधा संबंध राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से रहेगा। यह सिस्टम उद्योगों से निकलने वाले प्रदूषित बहिस्राव का ऑनलाइन रियल टाइम डाटा केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को भेजता है।

श्री राय ने बताया कि मछलियों के मरने के प्रासंगिक विषय में उन्होंने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेबसाइट पर टाटा स्टील लिमिटेड की फैक्ट्री से 30 मार्च और 1 अप्रैल के बीच निकलने वाले प्रदूषण के आंकड़ों की तलाश की तो पता चला कि राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वेबसाइट पर कोई आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

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