साल का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण मंगलवार को, भारत में सूतक काल रहेगा मान्य

ज्योतिषाचार्य साधन ज्ञान ने बताया धार्मिक-ज्योतिषीय महत्व
चांडिल, 02 मार्च : साल 2026 का पहला पूर्ण चंद्र ग्रहण मंगलवार 3 मार्च को लगेगा। ज्योतिषाचार्य साधन ज्ञान के अनुसार यह ग्रहण खगोलीय घटना के साथ-साथ धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी विशेष महत्व रखता है। शास्त्रों में ग्रहण काल को संयम, साधना और आत्मशुद्धि का समय बताया गया है।
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि चंद्र ग्रहण दोपहर 3:21 बजे से शाम 6:48 बजे तक रहेगा। भारत में चंद्रमा का उदय लगभग शाम 6:26 बजे होने के कारण यहां ग्रहण का अंतिम चरण ही दिखाई देगा। ग्रहण की अधिकतम अवस्था शाम 6:34 से 6:41 बजे के बीच रहेगी।
सूतक काल की मान्यता
चूंकि यह चंद्र ग्रहण भारत में दृश्य होगा, इसलिए सूतक काल मान्य रहेगा। सूतक काल की शुरुआत 3 मार्च की सुबह 6:21 बजे से मानी जाएगी। इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद रखने, मूर्तियों को स्पर्श न करने तथा सभी प्रकार के शुभ और मांगलिक कार्यों से परहेज करने की परंपरा है।
विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय या कोई नया कार्य प्रारंभ करना वर्जित माना गया है। गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
ग्रहण के बाद करें ये उपाय
ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान कर घर और पूजा स्थल की शुद्धि करना आवश्यक माना गया है। गंगाजल का छिड़काव कर भगवान की मूर्तियों को स्नान कराकर पुनः विधिवत पूजा करें। इसके पश्चात दान-पुण्य करना शुभ होता है। जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या धन का दान विशेष पुण्यकारी बताया गया है।
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि पूर्णिमा सोमवार 2 मार्च 5:42 से प्रारंभ होगा, जिसका समापन मंगलवार 3 मार्च को संध्या 4:58 बजे होगा। उन्होंने लोगों से अपील की है कि ग्रहण को भय का विषय न बनाकर इसे साधना, संयम और आत्मचिंतन के अवसर के रूप में अपनाएं।



