नवद्वीप धाम की पावन सुगंध से महका चिलगु — गिरिधारी शास्त्री महाराज के श्रीमुख से संपन्न हुआ श्रीमद्भागवत कथा का दिव्य रसपान

चांडिल, 27 फरवरी : सरायकेला -खरसावां जिले के चांडिल प्रखंड के चिलगु पुनर्वास कॉलोनी में बीते सात दिनों तक भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा की अविरल धारा प्रवाहित होती रही। पावन धरा नवद्वीप से पधारे प्रख्यात कथावाचक गिरिधारी शास्त्री महाराज के श्रीमुख से श्रीमद्भागवत कथा का दिव्य पाठ हुआ, जिसने पूरे क्षेत्र को भक्तिरस में सराबोर कर दिया।
शुक्रवार को आमलकी एकादशी के पुण्य तिथि के अवसर पर सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का विधिवत समापन हुआ। कथा श्रवण के लिए चिलगु सहित आसपास के गांवों से प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे, वहीं समापन दिवस पर श्रद्धालुओं की भीड़ अन्य दिनों की अपेक्षा अधिक रही। पूरा वातावरण “राधे-राधे” और “हरि बोल” के जयघोष से गुंजायमान होता रहा।
कथा के दौरान महाराज ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं, गोवर्धन धारण, रास लीला तथा भक्तों के प्रति भगवान की करुणा का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने धर्म और अधर्म के सूक्ष्म भेद को सरल भाषा में समझाते हुए सनातन परंपरा के आदर्शों, भक्ति मार्ग की महिमा तथा मानव जीवन में सत्संग के महत्व पर प्रकाश डाला। उनके मधुर वचनों ने श्रोताओं के अंतर्मन को स्पर्श किया और अनेक श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भक्ति रस में डूबते नजर आए।
सात दिवसीय इस दिव्य अनुष्ठान को सफल बनाने में लक्ष्मीकांत गोप, बिष्णु गोप, मधुसूदन गोप, दुर्योधन गोप, विवेकानंद गोप, विश्वजीत लायक, सनातन गांगुली, अनंत गोप, गोपाल कृष्ण महापात्र, भीम महापात्र, गौतम धिवर, जगदीश गोप सहित समस्त ग्रामवासियों की सक्रिय एवं सराहनीय भूमिका रही। ग्रामवासियों की एकजुटता और सेवा-भाव ने इस आयोजन को आध्यात्मिक उत्सव का स्वरूप प्रदान किया।

शनिवार को पूर्णाहुति एवं भंडारा
श्रीमद्भागवत कथा के समापन उपरांत शनिवार को चिलगु मंदिर प्रांगण में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन एवं पूजन के साथ पूर्णाहुति दी जाएगी। तत्पश्चात विशाल भंडारे का आयोजन होगा, जिसमें श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण कर पुण्य लाभ प्राप्त करेंगे।
यह सात दिवसीय कथा न केवल धार्मिक अनुष्ठान रही, बल्कि क्षेत्र में आध्यात्मिक जागरण और सामाजिक समरसता का भी संदेश दे गई। श्रद्धालुओं का मानना है कि ऐसे आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आने वाली पीढ़ियों को धर्म, संस्कृति और नैतिक मूल्यों की प्रेरणा मिलती है।



