दलमा की तराई में हजारों की हुंकार, ग्राम सभाओं ने ‘सहमति के बिना विकास नहीं’ का दिया संदेश

चांडिल , 26 फरवरी : दलमा तराई क्षेत्र बुधवार को जनसैलाब का साक्षी बना, जहां माकुलाकोचा फुटबॉल मैदान (हिरण पार्क के समीप) में आयोजित महा जन सम्मेलन में हजारों ग्रामीणों ने एक स्वर में ग्राम सभा की सहमति को सर्वोपरि मानने का संकल्प दोहराया। सम्मेलन का आयोजन दलमा क्षेत्र ग्राम सभा सुरक्षा मंच (कोल्हान प्रमंडल) के बैनर तले किया गया।
घने जंगलों और पहाड़ियों से घिरे प्राकृतिक परिवेश में हुए इस सम्मेलन में तराई के विभिन्न गांवों से बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा, ग्राम प्रधान, सामाजिक कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी शामिल हुए। मंच से वक्ताओं ने प्रस्तावित बंदरगाह परियोजना समेत क्षेत्र में चल रही अन्य विकास योजनाओं पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि बिना स्थानीय समुदाय की सहमति के किसी भी परियोजना को आगे बढ़ाना लोकतांत्रिक भावना के विपरीत है।
मुख्य संयोजक सुरेश चंद्र सोय ने कहा कि क्षेत्र की जनता विकास की विरोधी नहीं है, लेकिन ऐसा विकास स्वीकार्य नहीं होगा जिससे जल, जंगल और जमीन पर निर्भर जीवन-व्यवस्था प्रभावित हो। जिला परिषद सदस्य सह झारखंड बचाओ जन संघर्ष मोर्चा के माधव चंद्र कुंकल ने आरोप लगाया कि बड़े निवेश की योजनाओं में स्थानीय लोगों की भागीदारी नगण्य रहती है, जबकि असर सीधे उन पर पड़ता है।
ईचा खरकाई बांध विरोधी संघ के उपाध्यक्ष रेयांस सायड और बिरसा सेना के केंद्रीय अध्यक्ष दिनकर कच्छप ने संविधान की पाँचवीं अनुसूची, अनुच्छेद 244(1), पेसा अधिनियम 1996, वन अधिकार कानून 2006 और भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 का हवाला देते हुए कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभा की पूर्व स्वीकृति अनिवार्य है।
सम्मेलन में यह भी प्रस्ताव रखा गया कि दलमा क्षेत्र के लिए पर्यावरण संतुलन और स्थानीय आजीविका को केंद्र में रखकर ग्राम सभा आधारित विकास मॉडल तैयार किया जाए। वक्ताओं ने कहा कि वर्षों से योजनाओं पर भारी खर्च के बावजूद शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।
सभा के अंत में सर्वसम्मति से पारित प्रस्ताव में कहा गया कि क्षेत्र में किसी भी प्रकार के जबरन भूमि अधिग्रहण या प्रशासनिक दबाव का लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से विरोध किया जाएगा। साथ ही ग्राम सभाओं के बीच समन्वय मजबूत करने का निर्णय लिया गया।
कार्यक्रम में राधाकृष्णन सिंह मुंडा, जगन्नाथ सिंह मुंडा, धनंजय शुक्ला, टोनी दिप्ती मेरी मिंज, राकेश रंजन महतो (विस्थापित अधिकार मंच), रविन्द्र सिंह सरदार, डोमन बास्के, कर्मू चंद्र मार्डी, मेनका सिंह सरदार, सुखि टुडू (दिशोम गुरु स्वर्गीय शिबू सोरेन की बहन), सीएम हेमंत सोरेन के मामा गुरु चरण किस्कु, शक्तिपदो हांसदा सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे।
सम्मेलन ने यह स्पष्ट संकेत दिया कि दलमा क्षेत्र में विकास बनाम अधिकार की बहस अब संगठित जनआंदोलन का रूप ले रही है, जिसमें ग्राम सभाएं अपनी संवैधानिक भूमिका को लेकर पहले से अधिक मुखर नजर आ रही हैं।



