इंकैब कर्मचारियों की अपील एनसीएलएटी में स्वीकृत, एनसीएलटी के आदेशों पर उठाए गंभीर सवाल – अगली सुनवाई 21 अगस्त को

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इंकैब कर्मचारियों की अपील एनसीएलएटी में स्वीकृत, एनसीएलटी के आदेशों पर उठाए गंभीर सवाल – अगली सुनवाई 21 अगस्त को

जमशेदपुर, 10 जुलाई : इंकैब इंडस्ट्रीज लिमिटेड से जुड़े कर्मचारियों द्वारा राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) में दायर अपील को आज सुनवाई के बाद स्वीकृति मिल गई है। अपील, राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) द्वारा 8 जनवरी 2025 को पारित आदेशों के विरुद्ध दायर की गई थी। सुनवाई दिल्ली स्थित एनसीएलएटी मुख्यालय में हुई।

कर्मचारियों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव ने ट्राइब्यूनल को बताया कि यह अपील तीन महत्वपूर्ण न्यायिक आदेशों पर आधारित है, जिनकी रिज़ॉल्यूशन प्रोफेशनल (RP) पंकज टिबरेवाल ने जानबूझकर अवहेलना की है और एनसीएलटी ने भी इन आदेशों को नजरअंदाज कर निर्णय सुनाया।

क्या हैं कर्मचारी पक्ष की आपत्तियां :

अधिवक्ता श्रीवास्तव ने बताया कि— पहला आदेश दिल्ली उच्च न्यायालय का है, जिसमें कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि आर आर केबल्स और पेगासस एसेट रिकंस्ट्रक्शन प्रा. लि. जैसी कंपनियों का उद्देश्य इंकैब की जमीन पर कब्जा करना है।

बावजूद इसके, RP पंकज टिबरेवाल ने इन कंपनियों को, जिनमें कमला मिल्स और फस्क्वा इन्वेस्टमेंट भी शामिल हैं, इंकैब का वित्तीय लेनदार घोषित कर दिया और ₹4000 करोड़ का दावा स्वीकार कर लिया, जबकि दिल्ली उच्च न्यायालय के मुताबिक इंकैब की कुल देनदारी केवल ₹21.63 करोड़ ही थी।

कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि पंकज टिबरेवाल इन फर्जी कंपनियों के “एजेंट” के रूप में कार्य कर रहे हैं और जानबूझकर लेनदारों की समिति को प्रभावित करने के लिए गलत तरीके से उनके दावे मंजूर किए गए।

टाटा स्टील और सुप्रीम कोर्ट का संदर्भ :

अधिवक्ता ने बताया कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने टाटा स्टील को इंकैब का अधिग्रहण करने को कहा था, लेकिन टाटा स्टील ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इन कंपनियों द्वारा खरीदे गए तथाकथित एनपीए को रद्द करने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को एनसीएलटी में ले जाने की सलाह दी थी, लेकिन टाटा स्टील ने एनसीएलटी में कोई याचिका नहीं दायर की। इसके बाद इंकैब कर्मचारियों ने स्वयं धारा 9 के तहत याचिका दाखिल कर कंपनी को पुनर्जीवित करने की मांग की थी।

पहले भी हटाया गया था एक RP :

पूर्व में नियुक्त RP शशि अग्रवाल को भी एनसीएलएटी ने “कुटरचित कार्यों” के आरोप में हटाया था और बाद में IBBI ने उसकी RP बनने की अर्हता भी समाप्त कर दी थी।

ट्राइब्यूनल का आदेश :

रिजोल्यूशन प्रोफेशनल के वकील ने यह तर्क दिया कि कर्मचारियों को अपील करने का अधिकार नहीं है, लेकिन एनसीएलएटी ने इसे खारिज करते हुए तीन सप्ताह में हलफनामा (अफिडेविट) दाखिल करने का आदेश दिया। साथ ही, अपीलकर्ताओं को दो सप्ताह में उत्तर (रिज्वाइंडर) दाखिल करने का अवसर दिया गया।

अगली सुनवाई :

मामले की अगली सुनवाई 21 अगस्त 2025 को निर्धारित की गई है। इंकैब कर्मचारियों की ओर से अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव, आकाश शर्मा और रिषभ रंजन ने सुनवाई में भाग लिया।

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