फूलों की होली और सुदामा चरित्र के साथ गूंजा साकची, सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का भव्य समापन

जमशेदपुर, 17 फरवरी : साकची स्थित श्री रामलीला मैदान में सात दिनों तक चले आध्यात्मिक अनुष्ठान का समापन मंगलवार को भक्ति, भाव और उल्लास के अद्भुत संगम के साथ हुआ। श्री रामलीला उत्सव ट्रस्ट के तत्वावधान में श्री राम-कृष्ण मित्र मंडल द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा परिसर “राधे-श्याम” के जयघोष से गुंजायमान रहा।
समापन दिवस का केंद्र रहा सुदामा चरित्र का मार्मिक प्रसंग। वृंदावन धाम से पधारे कथा व्यास पूज्य संत स्वामी सर्वानंद महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की निष्कलुष मित्रता का भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि सच्ची मित्रता त्याग, समर्पण और आस्था की नींव पर टिकी होती है। सुदामा की दरिद्रता और उनकी अटूट भक्ति इस बात का प्रमाण है कि ईश्वर को वैभव नहीं, निर्मल हृदय प्रिय होता है। जैसे ही द्वारिका में सुदामा के स्वागत और उनके जीवन परिवर्तन का प्रसंग आया, श्रद्धालुओं की आंखें नम हो उठीं।
कथा के उपरांत वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधिवत हवन-पूजन संपन्न हुआ। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने आहुति देकर क्षेत्र की सुख-समृद्धि और विश्व शांति की कामना की। धूप-दीप और मंत्रों की गूंज से वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
इसके बाद आयोजित फूलों की होली ने कार्यक्रम में उल्लास का रंग घोल दिया। श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे पर पुष्प वर्षा कर प्रेम, सौहार्द और भाईचारे का संदेश दिया। रंग-बिरंगे फूलों से सजा पंडाल मानो वृंदावन की होली की छटा बिखेर रहा था।
सात दिवसीय आयोजन के दौरान प्रतिदिन भजन-कीर्तन, आरती और प्रसाद वितरण का क्रम चलता रहा। अंतिम दिन महाआरती के साथ कार्यक्रम का विधिवत समापन हुआ। कार्यक्रम में ट्रस्ट और मंडल के पदाधिकारियों सहित शहर के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
आयोजकों ने बताया कि ऐसे धार्मिक आयोजनों का उद्देश्य समाज में आध्यात्मिक चेतना का प्रसार और आपसी सद्भाव को मजबूत करना है। उन्होंने श्रद्धालुओं, सहयोगियों और नगरवासियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी इसी तरह के आयोजन जारी रखने का संकल्प दोहराया।



