चार श्रम संहिताएं श्रमिक अधिकारों पर हमला, इन्हें वापस ले सरकार : लिली दास

– राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल के तहत चांडिल बाजार में रैली व सभा आयोजित
चांडिल, 13 फरवरी : देश की उत्पादन व्यवस्था श्रमिकों के श्रम पर आधारित है और उन्हें जीवन निर्वाह योग्य मजदूरी, आठ घंटे का कार्यदिवस, सामाजिक सुरक्षा, स्थायी रोजगार तथा ट्रेड यूनियन अधिकारों की गारंटी मिलनी ही चाहिए। केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई चारों श्रम संहिताएं इन बुनियादी अधिकारों को कमजोर करती हैं और पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से बनाई गई हैं। सरकार अविलंब इन श्रम संहिताओं को वापस ले। उक्त बातें ए.आई.यू.टी.यू.सी. की राज्य उपाध्यक्ष एवं कार्यक्रम की मुख्य वक्ता लिली दास ने गुरुवार को चांडिल में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए कही।
दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों एवं स्वतंत्र फेडरेशनों के आह्वान पर मजदूर संगठन ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (एआईयूटीयूसी) के बैनर तले एक दिवसीय राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल के समर्थन में चांडिल बाजार में रैली एवं सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत चांडिल बस स्टैंड से हुई, जहां से सैकड़ों मजदूरों ने अपनी मांगों के समर्थन में रैली निकाली। रैली चांडिल चौक बाजार होते हुए स्टेशन रोड स्थित डाक बंगला पहुंची, जहां सभा आयोजित की गई।
सभा को संबोधित करते हुए मजदूर नेता बुद्धेश्वर माझी, मदन हँसदा, भूषण हेम्ब्रम और माधव तंतुबाई ने भी श्रम संहिताओं को श्रमिक हितों के विरुद्ध बताते हुए उन्हें वापस लेने की मांग की। सभा का संचालन आशुदेव महतो ने किया।
कार्यक्रम के अंत में वक्ताओं ने सरकार से श्रमिक वर्ग की न्यायोचित मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार कर श्रमिक हितों की रक्षा सुनिश्चित करने की मांग दोहराई।



