अवैध खनन पर कार्रवाई या सिर्फ दिखावा? खनन विभाग पर उठे गंभीर सवाल

MANBHUM UPDATES
3 Min Read

अवैध खनन पर कार्रवाई या सिर्फ दिखावा? खनन विभाग पर उठे गंभीर सवाल

चांडिल, 10 फरवरी : सरायकेला-खरसावां जिला में अवैध खनिज परिवहन के विरुद्ध जिला प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे अभियान के बीच खनन विभाग की कार्यशैली पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं। मंगलवार को चांडिल थाना क्षेत्र में पत्थर लदे दो वाहनों को पकड़े जाने के बाद जिस तरह की घटनाक्रम सामने आया, उसने पूरे मामले को संदेह के घेरे में ला दिया है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, चांडिल के हारुडीह में जब खनन विभाग की टीम ने अवैध पत्थर लदे एक ट्रैक्टर को पकड़ा, तो वहां हाई वोल्टेज ड्रामा शुरू हो गया। ट्रैक्टर संचालक के समर्थक मौके पर पहुंच गए और टीम के साथ तीखी नोकझोंक हुई। इतना ही नहीं, जप्त ट्रैक्टर को वहां से ले जाने से भी रोका गया। हालात बिगड़ते देख खनन विभाग को चांडिल थाना से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा। पुलिस हस्तक्षेप के बाद ही ट्रैक्टर को हुमीद ओपी ले जाया जा सका।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतनी बड़ी कार्रवाई और हंगामे के बावजूद मंगलवार देर रात तक जप्त वाहनों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। सूत्रों का दावा है कि किसी प्रभावशाली नेता के दबाव में आकर खनन विभाग ने एफआईआर दर्ज करने से परहेज किया। यदि यह सत्य है, तो यह न सिर्फ प्रशासनिक कमजोरी, बल्कि कानून के समक्ष नतमस्तक होने जैसा प्रतीत होता है।

जानकार बताते हैं कि खनन विभाग को नियमों के तहत बिना एफआईआर दर्ज किए जुर्माना लगाने का अधिकार है। लेकिन यहां मामला केवल जुर्माना तक सीमित नहीं दिखता। जिस तरह से मौके पर विरोध हुआ, सरकारी कार्रवाई में बाधा डाली गई और उसके बाद भी विभाग की चुप्पी बनी रही, वह कई प्रश्न खड़े करता है। क्या विभाग प्रभावशाली लोगों के दबाव में काम कर रहा है? क्या अवैध खनन पर सख्ती केवल कागजों तक सीमित है?

अवैध पत्थर लदे ट्रैक्टर को लेकर हुए इस घटनाक्रम की चर्चा पूरे क्षेत्र में आग की तरह फैल गई है। आमजन के बीच यह संदेश जा रहा है कि छोटे वाहनों पर कार्रवाई तो होती है, लेकिन जब दबाव आता है तो कानून की धार कुंद हो जाती है।

यदि जिला प्रशासन सचमुच अवैध खनन पर अंकुश लगाना चाहता है, तो पारदर्शिता और निष्पक्षता अनिवार्य है। अन्यथा औचक निरीक्षण और जब्ती की कार्रवाई महज औपचारिकता बनकर रह जाएगी। अब देखना यह है कि खनन विभाग इस मामले में स्पष्ट स्थिति रखता है या फिर सवालों के घेरे में ही घिरा रहता है।

Share This Article