चांडिल में 58 डिसमिल रैयती भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप, प्रशासन की भूमिका पर भी उठे सवाल

चांडिल, 28 जनवरी : चांडिल अंचल क्षेत्र के कारनीडीह मौजा में 58 डिसमिल रैयती भूमि पर कथित रूप से जबरन कब्जा किए जाने का मामला सामने आया है। इस मामले में पीड़ित रैयत एवं दलित समाज के सनातन लायक एवं निवारण लायक ने अंचलाधिकारी, चांडिल को लिखित आवेदन सौंपकर न्याय की गुहार लगाई है।
आवेदन में पीड़ितों ने बताया है कि खाता संख्या 203 एवं 204 के अंतर्गत प्लॉट संख्या 633, 607 एवं 631, कुल रकबा 58 डिसमिल भूमि उनके नाम से वर्तमान सर्वे सेटलमेंट खतियान में विधिवत दर्ज है। इसके बावजूद मेसर्स भारत ऑटो मोबाइल्स प्रा० लि० के निदेशक गजानंद भालोटिया द्वारा उक्त भूमि पर बिना विधिक प्रक्रिया अपनाए कथित रूप से कब्जा कर निर्माण कार्य कराया जा रहा है।
पीड़ितों का आरोप है कि उन्होंने कई बार अंचल कार्यालय से भूमि की विधिवत मापी एवं सीमांकन कराने का अनुरोध किया, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके, लेकिन हर बार प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न की गई। रैयतों के अनुसार, अंचल कार्यालय द्वारा भूमि मापी के लिए 28, 29 एवं 30 जनवरी की तिथि निर्धारित की गई थी। पहले दिन अंचल कर्मी द्वारा ग्रामीणों की उपस्थिति में एक प्लॉट की मापी की गई, किंतु आरोप है कि निर्माणाधीन चारदीवारी के भीतर मापक को प्रवेश करने से रोका गया था, काफ़ी हो हंगामा के बाद चारदिवारी में प्रवेश हुआ और भूमि की मापी हुई।
वहीं, दूसरे दिन मापक तो स्थल पर पहुंचा, लेकिन आरोपित पक्ष के उपस्थित नहीं होने के कारण मापी की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी। रैयतों का कहना है कि जानबूझकर प्रशासनिक प्रक्रिया को बाधित किया जा रहा है, जिससे अवैध कब्जे को स्थायी रूप दिया जा सके।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि भूमि से संबंधित दस्तावेज स्पष्ट हैं, तो किसी भी निजी कंपनी या प्रभावशाली व्यक्ति द्वारा बलपूर्वक कब्जा करना न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि आम नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों पर भी सीधा प्रहार है। कानून के जानकारों के अनुसार, बिना वैध स्वामित्व अथवा न्यायालय के आदेश के रैयती भूमि पर निर्माण कराना दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है।
पीड़ितों ने प्रशासन से मांग की है कि निष्पक्ष रूप से भूमि की मापी कराई जाए, अवैध कब्जे को तत्काल हटाया जाए तथा दोषी पक्ष के विरुद्ध विधिसम्मत कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
अब देखना यह होगा कि चांडिल प्रशासन इस मामले में कितनी तत्परता और निष्पक्षता के साथ कार्रवाई करता है, या फिर प्रभावशाली लोगों के दबाव में एक बार फिर रैयतों को न्याय के लिए भटकना पड़ेगा।



