वर्षों से जमे हुए मनरेगा कर्मियों का बड़े पैमाने पर स्थानांतरण, उपायुक्त ने तीन दिनों में योगदान का दिया आदेश

सरायकेला /चांडिल, 10 दिसंबर : सरायकेला-खरसावाँ जिले में मनरेगा अंतर्गत वर्षों से एक ही प्रखंड में कार्यरत संविदा कर्मियों के बड़े पैमाने पर स्थानांतरण का आदेश जारी कर दिया गया है। ग्रामीण विकास विभाग, झारखंड सरकार की “नियुक्ति, सेवा शर्त एवं कर्तव्य (संशोधित) नियमावली-2017” के आलोक में उपायुक्त द्वारा जारी आदेश में कुल 51 मनरेगा पदाधिकारियों एवं कर्मियों का अंतर-प्रखंड स्थानांतरण किया गया है।
इसमें प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी, कनीय अभियंता, लेखा सहायक, कंप्यूटर ऑपरेटर एवं अन्य संविदा कर्मी शामिल हैं। उपायुक्त की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में यह स्पष्ट निर्णय लिया गया था कि एक ही प्रखंड में तीन वर्ष या उससे अधिक समय से कार्यरत कर्मियों का स्थानांतरण अनिवार्य रूप से किया जाएगा। इसके बाद सभी प्रखण्ड विकास पदाधिकारियों से प्राप्त प्रस्तावों पर विचार कर अंतिम सूची तैयार की गई।
आदेश के अनुसार, सभी संबंधित कर्मियों को तीन दिनों के भीतर अपने नए पदस्थापन स्थल पर योगदान देने का निर्देश दिया गया है। साथ ही प्रखंड विकास पदाधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि पुराने पद पर कार्यरत कर्मी को समयबद्ध तरीके से विरमित किया जाए।
जनप्रतिनिधियों की पहल भी बनी आधार
जिले में लंबे समय से एक ही जगह जमे मनरेगा कर्मियों के स्थानांतरण को लेकर जिला परिषद उपाध्यक्ष मधुश्री महतो द्वारा लगातार मुद्दा उठाया जा रहा था। उन्होंने जिला स्तरीय बैठक, कुकड़ू के जनता दरबार तथा DC व DDC को पत्राचार के माध्यम से कई बार इस विषय को रखा था। उनका कहना था कि कई प्रखंडों में मनरेगा संविदा कर्मी 10–12 वर्षों से एक ही स्थान पर कार्यरत हैं, जिससे कार्य संस्कृति प्रभावित हो रही है और पारदर्शिता भी प्रभावित होती है।
इन्हीं जनहित एवं कार्यहित से जुड़े तर्कों को ध्यान में रखते हुए उपायुक्त ने नियमावली के अनुरूप संपूर्ण स्थानांतरण प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया।
तत्काल प्रभाव से लागू होगा आदेश
उपायुक्त सरायकेला-खरसावाँ द्वारा जारी आदेश ज्ञापांक 667/मनरेगा, दिनांक 05.12.2025 के अनुसार यह स्थानांतरण तत्काल प्रभाव से लागू माना जाएगा। सभी स्तरों पर इसकी प्रतिलिपि मनरेगा कोषांग, लोकपाल, प्रखंड विकास पदाधिकारियों तथा राज्यस्तरीय मनरेगा आयुक्त को भेज दी गई है।
इस निर्णय से जिले में मनरेगा के कार्यान्वयन में पारदर्शिता, निष्पक्षता तथा कार्य क्षमता में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।



