रांची/चांडिल, 25 सितंबर : गत 20 सितंबर को आदिवासी कुड़मी समाज के बैनर तले आयोजित रेल टेका–डहर छेका आंदोलन के बाद अब रेलवे पुलिस ने कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। इस सिलसिले में आरपीएफ, सुईसा पोस्ट की ओर से पांच नामजद सहित लगभग 500–600 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
एफआईआर में आजसू पार्टी के केंद्रीय महासचिव हरे लाल महतो, झारखंड आंदोलनकारी नेता सुनील महतो, आदिवासी कुड़मी समाज के नेता प्रभात महतो, बादल महतो समेत कई प्रमुख नेताओं का नाम शामिल है।
बड़काकाना – टाटा सहित 11 घंटे तक रुकी रही अन्य ट्रेनें
विदित हो कि 20 सितंबर को कुड़मी जाति को अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने, कुड़मालि भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने एवं सरना धर्मकोड की मांग को लेकर झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओड़िशा में व्यापक रेल रोको आंदोलन किया गया था। इस दौरान चांडिल अनुमंडल के नीमडीह थाना क्षेत्र अंतर्गत हेंसालौंग में रेलवे ट्रैक को आंदोलनकारियों ने 11 घंटे तक जाम रखा।
आंदोलन का नेतृत्व स्वयं आजसू पार्टी के केंद्रीय महासचिव हरे लाल महतो ने किया था। उनके साथ झारखंड आंदोलनकारी नेता सुनील महतो, झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा के नेता तरुण महतो, गोपेश्वर महतो उर्फ गोपेश महतो, खगेन महतो, अनूप महतो, राकेश रंजन महतो, फुलचाँद महतो समेत हजारों लोग शामिल हुए थे।
कई ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित
प्रदर्शनकारियों ने बड़काकाना–टाटा लोकल यात्री ट्रेन समेत कई यात्री एवं मालगाड़ियों का परिचालन ठप कर दिया था। इससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा और रेलवे को भी आर्थिक क्षति उठानी पड़ी।
रेलवे पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के बाद अब आंदोलन में शामिल नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ आगे की कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है। मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा झारखंड की सियासत में और अधिक गहराई से गूंज सकता है।
हमारी मांग जायज है, किसी भी कीमत पर अपना हक अधिकार लेकर रहेंगे
रेलवे की ओर से किए गए एफआईआर दर्ज को लेकर आजसू पार्टी के केंद्रीय महासचिव हरे लाल महतो ने कहा कि कुड़मी समाज की मांग बिल्कुल जायज है। समाज अपने खोए हुए पहचान और अस्तित्व के लिए लड़ाई लड़ रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी लड़ाई में कीमत चुकानी पड़ती है और कुड़मी समाज हर कीमत चुकाने के लिए तैयार है, किसी भी कीमत पर हक अधिकार लेकर रहेंगे।