
चांडिल,19 जून : क्षेत्र में तीन दिनों से लगातार हो रही मूसलधार बारिश के कारण चांडिल डैम का जलस्तर खतरनाक स्तर तक पहुँच गया है। जलस्तर को नियंत्रित करने के लिए अब डैम के कुल 11 फाटक खोल दिए गए हैं। इस कदम के बाद सुवर्णरेखा नदी उफान पर आ गई है, जिससे आसपास के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।
प्रशासन ने एहतियातन कदम उठाते हुए डैम के नीचे स्थित पुल पर आम जनों के आवागमन पर रोक लगा दी है। इससे क्षेत्र में जनजीवन प्रभावित हुआ है और लोग परेशान हैं।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, डैम के फाटक खुलने के बाद जमशेदपुर शहर के निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो गया है। इसे देखते हुए जमशेदपुर के कुछ प्रभावशाली नेताओं ने परियोजना अधिकारियों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है कि डैम के फाटक बंद किए जाएं ताकि शहरी इलाकों को संभावित जलभराव से बचाया जा सके।
वहीं दूसरी ओर, चांडिल डैम से विस्थापित हुए ग्रामीणों ने भी अपनी चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि डैम के जलस्तर में और बढ़ोतरी हुई तो उनके बचे-खुचे गांव और खेत जलमग्न हो जाएंगे। विस्थापितों ने सुवर्णरेखा बहुउद्देशीय परियोजना से स्पष्ट मांग की है कि डैम का जलस्तर स्थायी रूप से नियंत्रित रखा जाए ताकि उनके जीवन पर दोबारा संकट न मंडराए।
अब बड़ा सवाल यह है कि परियोजना अधिकारी किसकी सुनते हैं? क्या वे वर्षों पहले अपनी जमीन गंवाकर डैम के लिए जगह देने वाले विस्थापितों के दर्द को समझेंगे या फिर शहरी दबाव और प्रभावशाली नेताओं की मांग के आगे झुक जाएंगे?
स्थिति पर प्रशासन और परियोजना प्रबंधन की अगली रणनीति पर सभी की निगाहें टिकी हैं। बाढ़ नियंत्रण और जनहित के बीच संतुलन बनाना अब सुवर्णरेखा परियोजना अधिकारियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।


