लिव-इन रिश्ते का दर्दनाक अंत: प्रेमी युगल ने पेड़ से लटककर दी जान, मानसिक तनाव बना कारण!

जमशेदपुर/ पटमदा, 06 अगस्त,मानभूम अपडेट्स : पूर्वी सिंहभूम जिले के पटमदा थाना क्षेत्र अंतर्गत पोकलाबेड़ा गांव के पास एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां करीब तीन महीने से लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे एक प्रेमी युगल ने जंगल में एक ही नीम के पेड़ पर अलग-अलग दुपट्टों से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। बुधवार सुबह शवों से उठती दुर्गंध के बाद स्थानीय लोगों की नजर पड़ी, जिसके बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना पोकलाबेड़ा मोड़ से लगभग 300 मीटर अंदर जंगल क्षेत्र की है। दोनों के शव पेड़ से झूलते हुए पाए गए, जिन्हें देखकर अनुमान लगाया जा रहा है कि मौत दो दिन पूर्व ही हो चुकी थी।
पुलिस जांच में मृत युवक की पहचान पोकलाबेड़ा निवासी देवेंद्रनाथ सिंह के पुत्र जामिनी सिंह के रूप में हुई है। वहीं महिला की पहचान गाड़ीग्राम निवासी चंदन सिंह की पूर्व पत्नी के तौर पर हुई है। बताया जा रहा है कि महिला करीब तीन वर्षीय बेटी को पीछे छोड़ तीन माह पहले अपने घर से भाग गई थी और जामिनी के साथ जमशेदपुर में मजदूरी कर रही थी। दोनों वहीं से पटमदा क्षेत्र में आकर रहने लगे थे।
स्थानीय लोगों के अनुसार, युवक पूर्व में छेड़छाड़ के एक मामले में जेल की सजा काट चुका था और एक साल पहले ही रिहा हुआ था। जेल से आने के बाद ही उसकी महिला से पहचान हुई और दोनों साथ रहने लगे। लेकिन युवक के परिवारवालों ने महिला को बहू के रूप में स्वीकार नहीं किया, जिससे दोनों मानसिक तनाव में रहने लगे।
लिव-इन रिलेशनशिप के दुष्परिणाम
यह घटना एक बार फिर बिना सामाजिक स्वीकृति के रिश्तों की जटिलताओं को उजागर करती है। समाज और परिवार की अस्वीकृति, भावनात्मक असुरक्षा, और आर्थिक अस्थिरता ने इन दोनों को ऐसा कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया। विशेष रूप से जब पारिवारिक सहमति और सामाजिक समर्थन न मिले, तब लिव-इन जैसे रिश्ते युवाओं के लिए तनाव और अवसाद का कारण बन सकते हैं।
घटना की सूचना मिलते ही पटमदा थाना प्रभारी कर्मपाल भगत दल-बल के साथ मौके पर पहुंचे। शवों को पेड़ से उतार कर कब्जे में लिया गया और पंचनामा तैयार कर शवों को पोस्टमार्टम हेतु एमजीएम मेडिकल कॉलेज भेजा गया। साथ ही युवक के परिजनों से पूछताछ कर अन्य पहलुओं पर भी जांच जारी है।
इस हृदय विदारक घटना ने एक बार फिर समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि सिर्फ प्रेम पर्याप्त नहीं होता, जब तक कि उसे सामाजिक, पारिवारिक और कानूनी मान्यता न मिले। विशेष रूप से युवा वर्ग को भावनाओं में बहकर जल्दबाज़ी में रिश्तों में बंधने से पहले भविष्य की स्थिरता और सामाजिक स्वीकृति पर विचार अवश्य करना चाहिए। वरना लिव-इन जैसे रिश्ते भी दुखद अंत की ओर बढ़ सकते हैं।


