

चांडिल, 16 अगस्त : चांडिल थाना क्षेत्र के हुचुकडीह स्थित डोबो के टिड़ुआर ढ़िंड़ा (कुड़मि भवन) में रविवार को आदिवासी कुड़मि समाज की केंद्रीय एवं प्रदेश संगठन की एक दिवसीय प्रतिनिधि सम्मेलन आयोजित की गई। केंद्रीय अध्यक्ष शशांक शेखर महतो की अध्यक्षता में आयोजित सम्मेलन में आगामी जनगणना में कुड़मि समाज की जातीय एवं भाषाई पहचान सुनिश्चित करने सहित समाज की विभिन्न मांगों और आंदोलन की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए समाज के संयोजक मुलखुंटि मूलमानता अजीत प्रसाद महतो ने कहा कि सरकार को तीन महीने के भीतर कुड़मालि भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की दिशा में ठोस पहल करनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि निर्धारित अवधि में सकारात्मक पहल नहीं होने पर कुड़मि समाज की ओर से पुनः महाआंदोलन किया जाएगा।
अजीत महतो ने कहा कि इस वर्ष ऐतिहासिक रेल-टेका एवं डहर-छेंका कार्यक्रम की स्मृति में 20 सितंबर को ‘महासंग्राम दिवस’ के रूप में मनाया जाएगा। इसी क्रम में पुरुलिया जिले के बराहबाजार स्थित कड़ाडीह मैदान में ‘करमतिया करम महाजड़ुआहि’ का आयोजन किया जाएगा। इसमें झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और असम समेत विभिन्न राज्यों से कुड़मि समाज के सामाजिक एवं संगठनात्मक प्रतिनिधि शामिल होंगे।
उन्होंने कहा कि यह आयोजन महज एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज के अधिकारों, सामाजिक पहचान और लंबित मांगों को लेकर आगामी संघर्ष की दिशा तय करने का महत्वपूर्ण मंच होगा। इस दौरान आंदोलन की भावी रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।
अजीत महतो ने दावा किया कि 12 सितंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के दौरान कुड़मि समाज की मांगों को लेकर महत्वपूर्ण आश्वासन मिला है। उन्होंने कहा कि तीन महीने के भीतर कुड़मालि भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की दिशा में पहल करने तथा अलग कुड़मि धर्म-कोड की मांग पर भी सकारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया गया है। उन्होंने कहा कि समाज सरकार को तीन महीने का समय दे रहा है, हालांकि आवश्यकता पड़ने पर छह महीने तक इंतजार किया जा सकता है। इसके बाद भी मांग पूरी नहीं हुई तो महाआंदोलन की घोषणा की जाएगी।
वहीं, केंद्रीय प्रवक्ता अधिवक्ता सुनील कुमार गुलिआर ने कहा कि बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर से सरकार बनने के बाद कुड़मालि भाषा को आठवीं अनुसूची में शामिल करने का आश्वासन दिया गया था। उन्होंने कहा कि समाज ने समर्थन देकर सरकार बनाने में अपनी भूमिका निभाई है, इसलिए अब सरकार की जिम्मेदारी है कि वह अपने वादे को पूरा करे।
सम्मेलन में 20 सितंबर को प्रस्तावित महाजड़ुआहि कार्यक्रम में सभी सामाजिक संगठनों और समाज के लोगों से एकजुट होकर भाग लेने का आह्वान किया गया। वक्ताओं ने कहा कि समाज के व्यापक हित में आपसी मतभेदों को दरकिनार कर एकजुटता के साथ आगे बढ़ने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर केंद्रीय उपाध्यक्ष छोटेलाल मुतरुआर, सशधर काड़ुआर, केंद्रीय प्रवक्ता अधिवक्ता सुनील कुमार गुलिआर, केंद्रीय महासचिव जगेश्वर नागवंशी केसरिआर, केंद्रीय सह-सचिव जयराम हिंदइआर, दीपक पुनअरिआर, पद्मलोचन महतो, केंद्रीय महिला संयोजिका डॉ. कोनिका माहातो, गुणधाम मुतरुआर, ध्रुव चरण महतो समेत बड़ी संख्या में संगठन के प्रतिनिधि उपस्थित थे।


























