रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ के प्रयास रंग लाए, रांची–टाटा मार्ग के कायाकल्प को 214 करोड़ की मंजूरी
रांची, 15 जून : झारखंड के लाखों लोगों के लिए राहत और विकास की बड़ी खबर सामने आई है। लंबे समय से जर्जर हो चुके रांची–टाटा राष्ट्रीय राजमार्ग के पुनर्निर्माण और सुदृढ़ीकरण के लिए केंद्र सरकार ने ₹214.79 करोड़ की महत्वाकांक्षी ओवरले परियोजना को स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस उपलब्धि का श्रेय रक्षा राज्य मंत्री सह रांची सांसद संजय सेठ के लगातार प्रयासों और मजबूत पैरवी को दिया जा रहा है।
करीब 127 किलोमीटर लंबी इस परियोजना से राजधानी रांची और औद्योगिक नगरी जमशेदपुर के बीच यात्रा न केवल आसान और सुरक्षित होगी, बल्कि व्यापार, उद्योग और परिवहन को भी नई गति मिलेगी। वर्षों से खराब सड़क और गड्ढों की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए यह निर्णय किसी बड़ी राहत से कम नहीं माना जा रहा है।
बताया जाता है कि रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने रांची–टाटा मार्ग की बदहाल स्थिति को कई बार केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के समक्ष उठाया था। उन्होंने इस सड़क की महत्ता को देखते हुए इसके शीघ्र सुदृढ़ीकरण की मांग की थी। उनके निरंतर प्रयासों के बाद केंद्र सरकार ने परियोजना को मंजूरी दी है।
संजय सेठ ने इस स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि झारखंड में बेहतर सड़क नेटवर्क विकसित करना केंद्र सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि रांची–टाटा मार्ग राज्य की आर्थिक गतिविधियों की रीढ़ है और इसके उन्नयन से उद्योग, व्यापार, पर्यटन तथा आम लोगों को व्यापक लाभ मिलेगा।
परियोजना के तहत सड़क की क्षतिग्रस्त परत को हटाकर आधुनिक तकनीक से नई डामर परत बिछाई जाएगी। इससे सड़क की गुणवत्ता में सुधार होगा, दुर्घटनाओं में कमी आएगी और यात्रा समय भी घटेगा। कार्य का निष्पादन भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के मानकों के अनुरूप किया जाएगा।
18 जून को होने वाले भूमि पूजन कार्यक्रम को लेकर क्षेत्र में उत्साह का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय बाद इस महत्वपूर्ण मार्ग के पुनर्निर्माण की दिशा में ठोस पहल हुई है। लोगों ने इसके लिए रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ के प्रयासों की सराहना की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना के पूरा होने के बाद रांची–जमशेदपुर कॉरिडोर पर यातायात और अधिक सुगम होगा तथा झारखंड की आर्थिक गतिविधियों को भी नई ऊर्जा मिलेगी। यह परियोजना राज्य के आधारभूत ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।