दिवंगत मंत्री रामदास सोरेन के बेटे सोमेश सोरेन को मिल सकती है कैबिनेट में जगह, उपचुनाव से पहले बढ़ी चर्चा

रांची/जमशेदपुर 19 अगस्त : झारखंड की राजनीति में इन दिनों एक नया समीकरण बनने की चर्चा तेज हो गई है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री रहे रामदास सोरेन के निधन के बाद खाली हुई मंत्री पद की सीट पर उनके बेटे सोमेश सोरेन को कैबिनेट में जगह मिलने की संभावना जताई जा रही है।
रामदास सोरेन का 15 अगस्त को दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया था। उनके निधन से न केवल झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) को बड़ा झटका लगा है, बल्कि घाटशिला विधानसभा की सीट भी रिक्त हो गई है।
चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक, किसी भी विधानसभा सीट के खाली होने के छह महीने के भीतर उपचुनाव कराना अनिवार्य है। ऐसे में घाटशिला विधानसभा सीट पर आगामी महीनों में उपचुनाव होना तय है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सोमेश सोरेन को कैबिनेट में शामिल किया जाता है, तो उन्हें संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर मजबूती मिलेगी। साथ ही, उपचुनाव में उन्हें जनसमर्थन जुटाने में आसानी होगी।
पिता की विरासत और संगठन का समर्थन
रामदास सोरेन घाटशिला विधानसभा क्षेत्र से लगातार जनता से जुड़े रहे थे। उनके निधन के बाद स्वाभाविक रूप से क्षेत्र की राजनीति में सहानुभूति की लहर है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व भी यह सुनिश्चित करना चाहेगा कि परिवार और संगठन की पकड़ कमजोर न हो।
झामुमो सूत्रों का कहना है कि पार्टी नेतृत्व सोमेश सोरेन को राजनीति में सक्रिय भूमिका देने के पक्ष में है। यदि उन्हें मंत्री बनाया जाता है, तो उपचुनाव में यह कदम निर्णायक साबित हो सकता है।
वर्तमान में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शिक्षा विभाग का अतिरिक्त प्रभार अपने पास रखा है। हालांकि, कैबिनेट में रिक्त जगह को भरना सरकार के लिए भी जरूरी है ताकि विभागीय कार्य प्रभावित न हो। इस लिहाज से भी नए मंत्री की नियुक्ति को लेकर जल्द फैसला लिया जा सकता है।
फिलहाल झामुमो और गठबंधन दलों में इस विषय पर चर्चा चल रही है। हालांकि, आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है। लेकिन राजनीतिक हलकों में यह लगभग तय माना जा रहा है कि दिवंगत मंत्री की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए पार्टी सोमेश सोरेन पर दांव लगा सकती है।


