उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया रहिन परब

MANBHUM UPDATES
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उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया रहिन परब

Manbhum Updates, Desk :
झारखंड की जनजातीय संस्कृति और कृषि परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण लोक पर्व रहिन परब गुरुवार को पूरे उत्साह, श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। राज्य के विभिन्न ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों में लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए प्रकृति और कृषि देवताओं की पूजा-अर्चना की। इस दौरान ग्राम थान, देवली थान और घर के तुलसी ढीपी के पास परंपरा के अनुरूप बतख, मुर्गा, बकरा भेड़ आदि की बलि देने की भी परंपरा है।

जनजातीय समाज की विशेषता रही है कि उनकी परंपराएं प्रकृति की गोद में पल्लवित होती हैं। खेती-किसानी के हर चरण को उत्सव के रूप में मनाने की इसी परंपरा के तहत रहिन परब कृषि कार्य और बीज बोने की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व जेठ महीने में मनाया जाता है और इसी दिन से खेतों में हल चलाकर खेती कार्य का शुभारंभ किया जाता है। लोगों ने खेत में हल चलाकर कृषि कार्य का शुभारंभ किया।

गुरुवार सुबह से ही गांवों में घरों की साफ-सफाई, गोबर से लिपाई तथा तुलसी चौरा की पूजा की गई। महिलाएं और परिवार के अन्य सदस्य उपवास रखकर खेतों में बीज पूजन के लिए पहुंचे। धान समेत अन्य बीजों को शुभ मानते हुए धरती माता और सूर्य देव की पूजा-अर्चना की गई। पारंपरिक मान्यता के अनुसार रहिन माटी लाकर घर और तुलसी ढीपी में रखने की परंपरा भी निभाई गई, जिसे खेती और समृद्धि के लिए शुभ माना जाता है।
इस अवसर पर ग्रामीणों ने अच्छी फसल और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। रहिन परब जनजातीय समाज की प्रकृति के प्रति आस्था, कृषि संस्कृति और सामुदायिक एकता का जीवंत प्रतीक माना जाता है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार रहिन परब केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति, श्रम, खेती और सामुदायिक जीवन के प्रति आदर और कृतज्ञता का प्रतीक है।

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