नवरात्र के छठे दिन विधि-विधान से हुई मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना

चांडिल, 28 सितंबर : सार्वजनिक श्रीश्री नवदुर्गा पूजा कमेटी चौका मोड़ द्वारा शारदीय नवरात्र पर स्थापित देवी के नौ रूपों की प्रतिमा में रविवार को छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा-अर्चना की गई। इसे लिए सुबह देवी का कलश जल यात्रा निकाली गई। मंदिर मेंं कलश स्थापना के बाद देवी का पूजन प्रारंभ हुआ। देवी की आराधना करने के लिए रविवार को नवदुर्गा मंदिर में बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए। दूर-दराज से मंदिर पहुंचे देवी के भक्तों ने माता की पूजा-अर्चना की औश्र पूरे परिवार के सुख, समृद्धि और खुशहाली का कामना किए। पंडितों ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा संपन्न कराया। शारदीय नवरात्रि के छठे दिन रविवार की शाम बेलवरण कर अधिवास किया जाएगा।
महिषासुरमर्दिनी है मां कात्यायनी
आदि शक्ति महामाया मां दुर्गा का छठा स्वरूप मां कात्यायनी शक्ति का वो तेजस्वी और उग्र रूप हैं, जो बुराइयों का नाश करती हैं और अपने भक्तों की रक्षा करती हैं। नवरात्रि के छठे दिन इनकी पूजा की जाती है। उन्हें साहस, शक्ति और विजय का प्रतीक माना जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में महिषासुर नामक राक्षस के अत्याचारों से देवता और मनुष्य पीड़ित थे। महर्षि कात्यायन ने देवी भगवती की कठोर तपस्या की, ताकि वे उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लें। महर्षि की तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके घर जन्म लिया और इसी कारण उनका नाम कात्यायनी पड़ा। ब्रह्मा, विष्णु और महेश की तेजोमय शक्तियों से प्रकट होकर, मां कात्यायनी ने महिषासुर का वध किया, जिसके कारण उन्हें ‘महिषासुरमर्दिनी’ भी कहा जाता है।



