चांडिल : 78 साल आज़ादी, 25 साल झारखंड… लेकिन रामगढ़ के नौनिहाल अब भी कीचड़ में शिक्षा की राह तलाश रहे हैं

चांडिल, 12 अगस्त : देश इस 15 अगस्त को आज़ादी के 78 साल पूरे करेगा, और झारखंड भी इस साल 15 नवंबर को अलग राज्य बने 25 साल का सफर पूरा करेगा। इन दशकों में सत्ता बदली, सरकारें आईं और गईं, नेता और अफसर बदले, लेकिन विकास के वादे अक्सर कागज़ों में ही सिमट गए। तस्वीर साफ़ है — झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल प्रखंड के रामगढ़ गांव के बच्चों को आज भी स्कूल जाने के लिए कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है।
रामगढ़ गांव के टोला रस्काडीह प्राथमिक विद्यालय का रास्ता बरसात में दलदल में बदल जाता है। करीब 1500 फीट पक्की सड़क के लिए गांव के लोग और स्कूली बच्चे वर्षों से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन न सांसद, न विधायक और न ही जिला परिषद सदस्य ने इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाया। तस्वीर में दिख रहे ये छोटे-छोटे बच्चे नंगे पांव, कंधे पर बस्ता लटकाए, कीचड़ में फिसलते हुए स्कूल जा रहे हैं। साथ चल रही शिक्षिका भी संतुलन बनाए रखने के लिए मशक्कत कर रही हैं। यह दृश्य सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि विकास के वादों पर करारा तमाचा है।
स्थानीय अभिभावक पूछते हैं — “क्या हमारा हक़ सिर्फ वोट देने तक ही सीमित है? क्या जनप्रतिनिधि केवल चुनावी मौसम में ही जनता की सुध लेने आते हैं?”

बरसात के मौसम में स्थिति इतनी भयावह होती है कि कई बच्चे रास्ते में फिसलकर चोटिल हो जाते हैं और कई बार पढ़ाई से वंचित रह जाते हैं।
शिक्षा को सशक्त समाज की नींव माना जाता है, लेकिन अगर नींव तक पहुंचने का रास्ता ही कीचड़ में डूबा हो, तो हम कैसी प्रगति की बात कर सकते हैं? अब सवाल है — क्या जिला प्रशासन इस खबर पर ध्यान देगा और रामगढ़ के इन नौनिहालों के लिए 1500 फीट पक्की सड़क का सपना साकार करेगा, या फिर यह कहानी आने वाले सालों में भी जस की तस बनी रहेगी?



