देखिए गडकरी जी! आपके एनएचएआई की लापरवाही से 40 परिवारों की खतरे में जान – जलजमाव से जूझ रहा फादलोगोड़ा टोला

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देखिए गडकरी जी! आपके एनएचएआई की लापरवाही से 40 परिवारों की खतरे में जान – जलजमाव से जूझ रहा फादलोगोड़ा टोला

चांडिल, 03 जुलाई | सरायकेला-खरसावां जिला अंतर्गत चांडिल प्रखंड के आसनबनी पंचायत के फादलोगोड़ा टोला में जलजमाव की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो गई है। टाटा-रांची राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-33) के किनारे होटल के पीछे स्थित इस बस्ती में लगभग 40 परिवार निवास करते हैं। बीते कुछ दिनों की लगातार मूसलधार बारिश के कारण पूरा गांव जलमग्न हो गया है। घरों के चारों ओर कीचड़ और गंदे पानी की भरमार से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।

बीमारियों का खतरा और दुर्घटना की आशंका

गांव में जमा हुए गंदे पानी और कीचड़ से डायरिया, डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों के फैलने का खतरा मंडरा रहा है। स्थिति इतनी विकट है कि लोग घर से बाहर निकलने में भी डर रहे हैं। इस बस्ती के समीप ही दो विद्युत ट्रांसफार्मर स्थित हैं, जो कि जलजमाव के क्षेत्र में आ गए हैं। ऐसे में बिजली का करंट फैलने की आशंका से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। यदि यही स्थिति बनी रही तो भविष्य में कोई बड़ी दुर्घटना हो सकती है।

जलनिकासी की व्यवस्था बाधित, एनएचएआई पर आरोप

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, एनएचएआई ने बस्ती के जल निकासी के लिए तीन बड़े कल्वर्ट तो बना दिए हैं, लेकिन उन कल्वर्ट के मुख्य द्वार पर एक निजी कंपनी ने निर्माण कार्य कर मिट्टी और मलबा डाल दिया है। इससे पानी का प्रवाह अवरुद्ध हो गया है और बस्ती में पानी का जमाव लगातार बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक कल्वर्ट की सफाई और मार्ग नहीं खोला जाएगा, तब तक जलनिकासी संभव नहीं है।

प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन से मांग की है कि वे इस गंभीर स्थिति का संज्ञान लें और शीघ्र ही जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करें। साथ ही एनएचएआई और संबंधित कंपनी पर कार्रवाई कर कल्वर्ट से अवरोध हटाया जाए।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों से भी आग्रह किया गया है कि वे इस समस्या को प्राथमिकता में लेते हुए प्रशासनिक स्तर पर आवाज उठाएं, ताकि आने वाली किसी भी आपदा से पहले राहत एवं बचाव कार्य किए जा सकें।

पीड़ित ग्रामीणों ने बताया कि “हम रोज कीचड़ में घुसकर खाना-पीना और रहना मजबूरी में कर रहे हैं। बच्चे बीमार पड़ रहे हैं, बिजली का ट्रांसफार्मर डूबा हुआ है, कोई सुनने वाला नहीं है।”

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