
जेएलकेएम नेता देवेंद्र नाथ महतो ने कहा खरसावां गोलीकांड, शहादत का उद्देश्य अधूरा

खरसावां, 01 जनवरी : नव वर्ष का पहला दिन 1 जनवरी को पूरी दुनियां के लिए भले जश्न का दिन है लेकिन झारखंड के लिए काला दिन है, इस दिन आजाद भारत के पहले वर्ष 1 जनवरी 1948 को खरसावां गोलीकांड में हजारों आदिवासी मूलवासी शहीद हुए थे। खरसावां शहादत दिवस पर गुरुवार को झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा ने शहीदों को नमन किया। इस अवसर पर किता मैदान सरायकेला में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।
मौके पर मोर्चा के केंद्रीय वरीय उपाध्यक्ष देवेन्द्र नाथ महतो उपस्थित हुउ। उन्होंने कहा कि खरसावां गोलीकांड में खुन बहाने, त्याग, बलिदान देने के परिणामस्वरूप सरायकेला- खरसावां- चक्रधरपुर को ओडिशा में विलय करना रद्द हुआ था। इसके बाद झारखंड का जन्म हुआ, पेशा कानून बनी। लेकिन घटना के 77 वर्ष बाद भी वह दर्द ताजा है, जख्म भरा नहीं है। झारखंड गठन के 25 साल बाद भी स्थानीय नीति, नियोजन नीति, परीक्षा कैलेण्डर लागू नहीं होना, अवैध तरीके से जल, जंगल, जमीन का लूट होना, झारखंडी आदिवासी मूलवासी युवाओं को रोजगार नहीं मिलना शहीदों का अपमान है।
उन्होंने कहा कि समस्त झारखंड वासियों को एकजुट होकर शहीदों के सपनों का झारखंड बनाना होगा तभी सच्ची श्रद्धांजलि होगी। इस अवसर पर सरायकेला से प्रत्याशी रहे प्रेम मार्डी ने कहा कि शहीदों का सपना साकार करने के लिए संघर्ष जारी रहेगा। वहीं, कोल्हान अध्यक्ष नवीन महतो ने कहा कि शहीदों के सपना को साकार करने के लिए समस्त झारखंडी को एकजुट होना होगा। सभा के दौरान झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकर्ता, पूर्व मुखिया, जिला परिषद प्रत्याशी आदि ने झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा का दामन थामा। कार्यक्रम में सृजन हाईबुरू, गोपेश महतो, वीना देवी, सविता देवी, मीनाक्षी देवी, भानुमति देवी, बिंदे के अलावा अन्य लोग उपस्थित हुए।



