झारखंड सरकार की अनुकरणीय पहल ने बदली धारणा : कांवर यात्रा मार्ग पर सुविधाएं, सेवा और स्वागत ने जीता श्रद्धालुओं का दिल

रिपोर्ट: मनभूम अपडेट्स : झारखंड को लेकर प्रायः यह धारणा बनी रहती है कि यहां की सरकारी सुविधाएं अपेक्षाकृत कमजोर होती हैं, और जनसेवा के मामले में राज्य पिछड़ा हुआ है। लेकिन सावन मास में बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर की ओर जानेवाले कांवरियों के स्वागत में झारखंड सरकार द्वारा की गई तैयारियों और सेवाओं ने इस सोच को पूरी तरह से बदल दिया है।
दुम्मा बॉर्डर से स्वागत का भव्य आरंभ
उत्तर वाहिनी गंगा, सुल्तानगंज (बिहार) से जल भरकर कांवर यात्री 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा पर निकलते हैं। इस यात्रा का लगभग 91 किलोमीटर भाग बिहार में है, और शेष 14 किलोमीटर झारखंड के देवघर जिले में। जैसे ही श्रद्धालु दुम्मा बॉर्डर पार कर झारखंड में प्रवेश करते हैं, वहां का दृश्य देखकर वे चकित रह जाते हैं।
झारखंड सरकार ने बॉर्डर पर श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए पानी के फव्वारे लगाए हैं, जिससे यात्रा की थकान उतर जाती है। वहीं, दो से तीन साफ-सुथरे शौचालय और स्नानागार श्रद्धालुओं के उपयोग के लिए बनाए गए हैं। इनकी सफाई और गुणवत्ता इतनी उच्चस्तरीय है कि कई श्रद्धालुओं को यह विश्वास ही नहीं हुआ कि यह व्यवस्था सरकारी है। जब चांडिल (सरायकेला-खरसावां) से आए कांवर यात्रियों ने “जय झारखंड” का नारा लगाते हुए वहां विश्राम किया और इन सुविधाओं का उपयोग किया, तो अन्य राज्यों से आए श्रद्धालु भी आकर्षित होकर वहां पहुंचे और जानकारी ली। उन्हें जब ज्ञात हुआ कि यह सब झारखंड सरकार की पहल है, तो उन्होंने इसकी भूरी-भूरी प्रशंसा की।

स्वास्थ्य और धार्मिक सेवाओं की अद्वितीय व्यवस्था
दुम्मा बॉर्डर पर झारखंड सरकार की ओर से स्वास्थ्य शिविर की भी व्यवस्था की गई है। श्रद्धालुओं की चिकित्सा जांच के साथ उनकी गिनती भी की जा रही है, जिससे प्रशासनिक निगरानी और व्यवस्था बेहतर हो सके। देवघर जिले में बाबा धाम तक जाने वाले पूरे पैदल मार्ग पर झारखंड सरकार ने कई जगहों पर स्थायी व अस्थायी सरकारी शिविर लगाए हैं, जहां भजन-कीर्तन, आरती, हवन जैसे धार्मिक अनुष्ठान प्रतिदिन आयोजित किए जा रहे हैं।

विश्राम और पैदल यात्रा के लिए विशेष सुविधा
श्रद्धालुओं के आराम के लिए बड़े-बड़े टेंट शिविर लगाए गए हैं, जिनमें दिन-रात विश्राम की सुविधा उपलब्ध है। यही नहीं, दुम्मा बॉर्डर से लगभग 6 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद झारखंड सरकार द्वारा पक्की सड़क पर कॉरपेट बिछाया गया है, जिससे कांवरियों को पैदल चलते समय गर्मी, चोट या थकान से राहत मिल सके।
यह सभी सुविधाएं बिहार सरकार द्वारा की गई व्यवस्थाओं से किसी भी रूप में कम नहीं हैं, बल्कि कई मायनों में बेहतर उदाहरण पेश करती हैं।

नकारात्मक धारणा को बदलता झारखंड
इस बार की कांवर यात्रा में झारखंड सरकार की सक्रियता, सेवा और समर्पण ने एक नया संदेश दिया है — कि राज्य न केवल विकास की ओर अग्रसर है, बल्कि जनसेवा में भी अब पीछे नहीं है। जो श्रद्धालु यह मानते थे कि झारखंड में सरकारी सुविधा नहीं होती, उनकी सोच अब बदल रही है।
झारखंड सरकार की यह पहल सिर्फ व्यवस्था नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं के सम्मान और आस्था का सम्मान है — और यही इसे खास बनाता है।
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