20 लाख की नोटिस भेजने वाले खनन पदाधिकारी के कार्यकाल में स्वर्णरेखा नदी से दिनदहाड़े अवैध बालू खनन, कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल

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20 लाख की नोटिस भेजने वाले खनन पदाधिकारी के कार्यकाल में स्वर्णरेखा नदी से दिनदहाड़े अवैध बालू खनन, कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल

चांडिल, 02 जुलाई : सरायकेला-खरसावां जिले में अवैध खनन के खिलाफ कार्रवाई को लेकर खनन विभाग एक बार फिर सवालों के घेरे में है। विडंबना यह है कि अवैध खनन और बालू के अवैध परिवहन से संबंधित समाचार प्रकाशित होने पर मीडिया संस्थान को कानूनी नोटिस भेजने वाले खनन पदाधिकारी अपने कार्यकाल में खुलेआम हो रहे अवैध बालू खनन पर प्रभावी रोक लगाने में विफल नजर आ रहा है।

ताजा मामला 29 जून का बताया जा रहा है। ईचागढ़ थाना क्षेत्र के सोड़ो और जारगोडीह स्थित स्वर्णरेखा नदी में दिनदहाड़े जेसीबी और ट्रैक्टरों के माध्यम से बालू का अवैध खनन किए जाने का दावा किया गया है। इस संबंध में उपलब्ध फोटो और वीडियो में गूगल लोकेशन, तिथि और समय दर्ज होने का भी दावा किया गया है, जिससे पूरे मामले पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

गौरतलब है कि NGT के दिशा-निर्देशों के अनुसार नदी के अंदर बालू खनन पर प्रतिबंध है। इसके बावजूद यदि स्वर्णरेखा नदी के बीचों-बीच खुलेआम बालू निकाला जा रहा है, तो यह खनन विभाग की निगरानी व्यवस्था और कार्रवाई की गंभीर विफलता को दर्शाता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अवैध खनन की शिकायतें मिलने के बाद भी विभाग की कार्रवाई केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है, जबकि अवैध कारोबार लगातार जारी रहता है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब विभाग मीडिया में प्रकाशित खबरों पर आपत्ति जताते हुए 20 लाख रुपये का नोटिस भेज सकता है, तो उसी तत्परता के साथ अवैध खनन करने वालों पर कठोर कार्रवाई क्यों नहीं कर पा रहा? यदि नदी से खुलेआम बालू की निकासी हो रही है, तो इसके लिए जिम्मेदारी तय होना भी आवश्यक है।

इधर, जिला उपायुक्त नीतीश कुमार सिंह लगातार अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई के निर्देश देते रहे हैं। इसके बावजूद यदि प्रतिबंधित क्षेत्र में दिनदहाड़े बालू खनन जारी है, तो यह केवल अवैध कारोबारियों की सक्रियता ही नहीं, बल्कि विभागीय निगरानी और प्रवर्तन व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध ठोस कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी पूर्व की तरह केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाता है।

इस संबंध में जिला खनन पदाधिकारी से संपर्क कर उनका पक्ष लेने का प्रयास किया गया लेकिन हमेशा की तरह खनन पदाधिकारी ने फोन रिसीव नहीं किया, जिसके कारण उनका पक्ष नहीं मिल पाया।

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