पेसा नियमावली की मूल भावना से खिलवाड़ के खिलाफ हाईकोर्ट में सुनवाई, सरकार से मांगा जवाब

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रांची, 11 मई : झारखंड उच्च न्यायालय में पेसा नियमावली को सही तरीके से लागू नहीं किए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश एसएम सोनक एवं न्यायाधीश राजेश शंकर की खंडपीठ ने राज्य सरकार को बिंदुवार जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। रायमूल बांडरा और अरविंद कुमार की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि राज्य सरकार ने पेसा नियमावली की मूल भावना के विपरीत संशोधन और प्रावधान लागू किए हैं, जिसके कारण आदिवासी एवं मूलवासी समुदायों को संविधान प्रदत्त अधिकारों से वंचित होना पड़ रहा है।

याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि पेसा कानून ग्रामसभा को जो अधिकार देता है, उन्हें व्यवहारिक रूप से कमजोर कर दिया गया है। सरकार ने नियमावली को अपने नियंत्रण में रखने की मंशा से लागू किया है, जिससे स्थानीय समुदायों की स्वायत्तता प्रभावित हो रही है। न्यायालय ने सरकार से पूछा है कि याचिकाकर्ताओं द्वारा उठाए गए बिंदु तथ्यात्मक रूप से सही हैं या नहीं तथा क्या संविधान के अनुरूप नियमावली में संशोधन किए गए हैं। अदालत ने अगली सुनवाई तक सरकार को विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई जून महीने के अंतिम सप्ताह में निर्धारित की गई है।

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