स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा बैठक – उपायुक्त ने दिए योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश,

ANM और CHO को कारण बताओ नोटिस जारी, स्वास्थ्य केंद्रों में 24×7 आपातकालीन सेवाएं सुनिश्चित करने का निर्देश
सरायकेला, 14 जुलाई : समाहरणालय सभागार में सोमवार को उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी नितिश कुमार सिंह की अध्यक्षता में स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं एवं कार्यक्रमों की गहन समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस अवसर पर उप विकास आयुक्त रीना हांसदा, सिविल सर्जन, अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी सहित जिले के सभी एमओआईसी और अन्य स्वास्थ्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
बैठक के दौरान उपायुक्त ने अस्पताल संचालन निधि, एनीमिया मुक्त भारत अभियान, कुपोषण उपचार केंद्र (एमटीसी), गर्भवती महिलाओं की जांच (ANC), संस्थागत प्रसव, नियमित टीकाकरण, फाइलेरिया उन्मूलन, कुष्ठ रोग उपचार, परिवार नियोजन और रक्तकोष की अद्यतन स्थिति जैसे प्रमुख बिंदुओं की गहन समीक्षा की।
धीमी प्रगति पर जताई नाराजगी, नोटिस जारी
बैठक में जिन क्षेत्रों में योजनाओं की प्रगति असंतोषजनक पाई गई, वहां के संबंधित एएनएम और सीएचओ को कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्देश दिया गया। उपायुक्त ने सख्त लहजे में कहा कि विभागीय योजनाएं लक्षित परिणामों के अनुरूप क्रियान्वित हों, यह प्रत्येक स्तर पर सुनिश्चित किया जाए।
प्रमुख निर्देश और प्राथमिकताएं :
सभी स्वास्थ्य केंद्रों में 24×7 आपातकालीन सेवाएं चालू रहें।
VHND, टीकाकरण, दिव्यांग जांच, टीबी, मलेरिया, फाइलेरिया और कुष्ठ रोग पर आधारित विशेष कैंप नियमित रूप से आयोजित हों।
एम्बुलेंस और ममता वाहन का संचालन बेहतर तरीके से सुनिश्चित करने के लिए उन्हें संबंधित केंद्रों से टैग किया जाए और सतत निगरानी रखी जाए।
प्रत्येक तीन माह में “सास-बहू-पति सम्मेलन” आयोजित कर जनजागरूकता कार्यक्रम चलाए जाएं।
कम वजन वाले नवजातों की पहचान कर उन्हें SNCU/MTC में भर्ती कर पोषणयुक्त आहार और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
मानसून जनित रोगों जैसे डायरिया और मलेरिया से बचाव के लिए जल परीक्षण और नियमित स्वास्थ्य परीक्षण की व्यवस्था की जाए।
स्वास्थ्य एवं समाज कल्याण विभाग आपसी समन्वय से SNCU/MTC की बेड क्षमता के अनुसार कार्ययोजना बनाकर क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।
डिजिटल सेवाओं पर भी जोर
उपायुक्त ने कहा कि डिजिटल हेल्थ सेवाओं की पहुंच गांव-गांव तक सुनिश्चित हो और सभी चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों की रोस्टरवार उपस्थिति सख्ती से सुनिश्चित की जाए।
अंत में उन्होंने सभी MOICs को निर्देशित किया कि केंद्रवार माइक्रो-प्लान तैयार किया जाए, जिससे संसाधनों की जरूरतों को चिन्हित कर नागरिकों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।



