खनन प्रभावित 1700 से अधिक गांवों के विकास पर मंथन, ग्राम सभाओं से मिले 5000 प्रस्ताव

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डीएमएफटी की राशि से सामुदायिक विकास को मिलेगी प्राथमिकता, उपायुक्त बोले- व्यक्तिगत लाभ के बजाय ऐसी योजनाएं चुनें जिनसे अधिकतम आबादी को मिले फायदा

जमशेदपुर, 05 नवंबर : पूर्वी सिंहभूम जिले के खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति देने के लिए जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) की न्यास परिषद ने योजनाओं के चयन और प्राथमिकता निर्धारण पर मंथन किया। जिले के 1,700 से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष खनन प्रभावित गांवों के विकास के लिए ग्राम सभाओं के माध्यम से 5,000 से अधिक प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावों पर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच चर्चा कर जरूरत के अनुसार योजनाओं के चयन पर जोर दिया गया।

गुरुवार को सिदगोड़ा टाउन हॉल में उपायुक्त राजीव रंजन की अध्यक्षता में डीएमएफटी न्यास परिषद की बैठक आयोजित हुई। बैठक में सांसद एवं विधायक प्रतिनिधियों, विभिन्न पंचायतों के मुखियाओं तथा संबंधित विभागों के पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक का मुख्य उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकास योजनाओं का चयन करना और डीएमएफटी की राशि का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना रहा।

बैठक में बताया गया कि जिले के सभी 11 प्रखंडों में 2 अक्टूबर को आयोजित ग्राम सभाओं के माध्यम से योजनाओं के प्रस्ताव आमंत्रित किए गए थे। इसके तहत 5,000 से अधिक प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इनमें गांवों की बुनियादी जरूरतों, स्थानीय समस्याओं और विकास से जुड़ी अपेक्षाओं को सामने रखा गया है। इन प्रस्तावों पर जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श कर आपसी सहमति से प्राथमिकताएं तय की जाएंगी।

उपायुक्त राजीव रंजन ने कहा कि जिले में डीएमएफटी के तहत प्रतिवर्ष लगभग 12 से 13 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त होती है। वहीं, जिले के 1,506 गांव खनन से प्रत्यक्ष और 200 से अधिक गांव अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित हैं। प्रभावित गांवों की बड़ी संख्या को देखते हुए उपलब्ध राशि सीमित है। ऐसे में योजनाओं का चयन वास्तविक जरूरतों और व्यापक जनहित को ध्यान में रखकर करना आवश्यक है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि डीएमएफटी की राशि का उपयोग ऐसी योजनाओं में होना चाहिए, जिनका लाभ किसी एक व्यक्ति के बजाय पूरे समुदाय को मिले। विद्यालयों में अतिरिक्त कक्षों का निर्माण, आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थापना और सड़कों का निर्माण जैसी योजनाओं को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि योजनाओं की उपयोगिता, सामुदायिक लाभ और दीर्घकालिक विकास को ध्यान में रखकर संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग किया जाना चाहिए। शहरी क्षेत्र में जोहार मार्ट का निर्माण भी सामुदायिक उपयोगिता की ऐसी ही पहल का उदाहरण है।

उप विकास आयुक्त नागेन्द्र पासवान ने जनप्रतिनिधियों एवं मुखियाओं से अपने-अपने पंचायतों के खनन प्रभावित क्षेत्रों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप योजनाओं के चयन में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की। उन्होंने कौशल विकास, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास तथा आधारभूत संरचना से जुड़ी योजनाओं के प्रस्तावों को प्राथमिकता देने की बात कही।

बैठक में शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास, महिला एवं बाल विकास तथा बुनियादी सुविधाओं के विस्तार से संबंधित प्रस्तावों पर भी चर्चा हुई। जनप्रतिनिधियों एवं पंचायत प्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्रों की समस्याओं और विकास संबंधी आवश्यकताओं से अधिकारियों को अवगत कराया।

बैठक में उपायुक्त के अलावा उप विकास आयुक्त नागेन्द्र पासवान, जिला खनन पदाधिकारी, जिला योजना पदाधिकारी, सांसद एवं विधायक प्रतिनिधि, विभिन्न पंचायतों के मुखिया सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।

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