झारखंड हाईकोर्ट में JNAC पर सख्ती: डिप्टी कमिश्नर कृष्ण कुमार को 20 नवंबर को सशरीर उपस्थित होने का आदेश

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झारखंड हाईकोर्ट में JNAC पर सख्ती: डिप्टी कमिश्नर कृष्ण कुमार को 20 नवंबर को सशरीर उपस्थित होने का आदेश

रांची /जमशेदपुर, 19 नवंबर : रिट याचिका संख्या 2078/2018 (राकेश झा बनाम झारखंड सरकार) की सुनवाई में झारखंड उच्च न्यायालय ने एक बार फिर जमशेदपुर नॉटिफाइड एरिया कमेटी (JNAC) पर कड़ा रुख अपनाया। अदालत ने कहा कि 17 सितंबर को दिए गए निर्देशों के बावजूद JNAC लगातार अधूरे और भ्रामक हलफनामे दाखिल कर रही है।

अदालत ने JNAC से पार्किंग कब्जाधारियों, अवैध निर्माण करने वाले बिल्डरों, कम्पलीशन सर्टिफिकेट जारी अथवा लंबित भवनों तथा बिना कम्पलीशन सर्टिफिकेट के बिजली-पानी कनेक्शन पाने वाली बिल्डिंगों का पूरा विवरण टेबलर फॉर्म में मांगा था। लेकिन 10 नवंबर और आज 19 नवंबर को दाखिल हलफनामे में भी JNAC कोई ठोस जानकारी नहीं दे सकी, जिस पर अदालत ने नाराजगी जताई।

सुनवाई के दौरान मौजूद JNAC के स्पेशल ऑफिसर ने बताया कि मुख्य प्रभार डिप्टी कमिश्नर कृष्ण कुमार के पास है। इस पर अदालत ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि DC पहले भी अदालत को गुमराह करने की कोशिश कर चुके हैं। अदालत ने आदेश दिया कि डिप्टी कमिश्नर कृष्ण कुमार को 20 नवंबर 2025 को अदालत में सशरीर उपस्थित होना होगा, अन्यथा अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव ने दलील दी कि JNAC 2011 से वही पुरानी 46 अवैध बिल्डिंगों की सूची हलफनामों में दे रही है जबकि अवैध निर्माण लगातार बढ़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 6 वर्षों में DC कृष्ण कुमार द्वारा जारी 650 बिल्डिंग प्लान अवैध हैं और बिना कम्पलीशन सर्टिफिकेट के अधिकांश भवनों को बिजली-पानी कनेक्शन दे दिया गया है।

मुख्य न्यायाधीश ने JNAC से पूछा कि यदि अवैध निर्माण नहीं हैं तो अब तक केवल 54 कम्पलीशन सर्टिफिकेट ही क्यों निर्गत किए गए? जवाब में JNAC के अधिवक्ता बार-बार इंडस्ट्रियल टाउन की बात करते रहे, जिस पर नाराज होकर अदालत ने उन्हें विषय पर रहने की चेतावनी दी।

अदालत ने कहा कि JNAC चाहे कानूनी संस्था हो या न हो, पूरे जमशेदपुर में हुए अवैध निर्माणों पर जवाबदेही JNAC की ही है।

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अखिलेश श्रीवास्तव और नेहा अग्रवाल उपस्थित रहे।

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