चांडिल : सरकारी जमीनों पर बढ़ रहा अवैध कब्जा और फर्जीवाड़ा – प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

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चांडिल : सरकारी जमीनों पर बढ़ रहा अवैध कब्जा और फर्जीवाड़ा – प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

चांडिल, 21 अगस्त : सरायकेला-खरसावां जिले में भूमाफियाओं के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि वे अब खुलेआम सरकारी जमीन पर कब्जा करने में जुट गए हैं। चांडिल अंचल के मौजा पूड़ीसीली में ऐसा ही मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन की कार्यप्रणाली और उसकी निष्क्रियता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सरकारी बोर्ड के बावजूद कब्जा

जानकारी के अनुसार, कांदरबेड़ा–दोमुहानी मार्ग स्थित पूड़ीसीली चौक के समीप आशियाना प्रकृति फ्लैट निर्माण स्थल के पीछे की सरकारी भूमि पर भूमाफियाओं ने चारों ओर से टीना शेड लगाकर घेराव करना शुरू कर दिया है। जबकि इसी जमीन पर झारखंड सरकार का बाकायदा बोर्ड लगा हुआ है, जिसमें स्पष्ट उल्लेख है – “झारखंड सरकार, राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग, मौजा पूड़ीसीली, थाना संख्या 328, खाता संख्या 234, खेसरा संख्या 205। यह भूमि सरकारी है, इस भूमि का क्रय-विक्रय या अतिक्रमण दंडनीय अपराध है।”

इसके बावजूद माफिया तत्व बिना किसी भय के कब्जे की कार्रवाई कर रहे हैं।

मुखिया प्रतिनिधि का निरीक्षण – ग्रामीण हैरान

मामले की जानकारी मिलने पर आज मुखिया प्रतिनिधि हरेंद्र सिंह मौके पर पहुंचे। निरीक्षण के दौरान ग्रामीणों ने देखा कि भूमाफियाओं ने पूरे भूखंड पर कब्जा कर लिया है, जिस पर कल दोपहर से घेराबंदी की जा रही थी। हरेंद्र सिंह ने कहा –

“अंचल प्रशासन ने उक्त भूखंड को चिन्हित कर सरकारी बोर्ड लगाया था। इसके बावजूद घेराबंदी कर कब्जा करना सरासर गैरकानूनी है। यह प्रशासन की लापरवाही और भूमाफियाओं की गुंडागर्दी का प्रमाण है।”

उन्होंने बताया कि सरकारी प्रक्रिया के तहत इस भूखंड की मापी की गई थी और इसे सुरक्षित घोषित किया गया था। इसकी खाता संख्या 234, प्लॉट संख्या 205, रकवा करीब 20-25 कट्ठा है। उन्होंने कहा कि वे जल्द ही इस मामले पर लिखित शिकायत दर्ज कराएंगे।

ग्रामीणों का आक्रोश – ‘मिलीभगत के बिना संभव नहीं’

ग्रामीणों का कहना है कि दिन-दहाड़े सरकारी भूमि पर कब्जा और प्रशासन का चुप रहना गहरी मिलीभगत की ओर इशारा करता है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यदि प्रशासनिक स्तर पर सख्ती होती तो भूमाफिया इतनी हिम्मत नहीं जुटा पाते।

अन्य पंचायतों में भी जमीन का खेल

इन दिनों चांडिल अंचल अंतर्गत तमोलिया पंचायत के कमारगोड़ा, डोबो, धन्नीगोड़ा, गौरी, पूड़ीसीली; आसनबनी पंचायत के फदलोगोड़ा, आसनबनी, बिरिगोड़ा, रामगढ़, कांदरबेड़ा; तथा चिलगु पंचायत के भुइंयाडीह में जमीन की खरीद-बिक्री का खेल खूब चल रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि आए दिन इन क्षेत्रों में जमीन विवाद के मामले सामने आते हैं। अवैध तरीके से जमीन हड़पने, धोखाधड़ी करने तथा फर्जी कागजात के सहारे सरकारी और CNT-SPT एक्ट की जमीनों पर कब्जा करने की घटनाएं अब आम हो गई हैं।

आशियाना प्रोजेक्ट पर भी उठे सवाल

ग्रामीणों ने यह भी याद दिलाया कि जब आशियाना प्रकृति नामक प्रोजेक्ट शुरू हुआ था, तब वन विभाग, चांडिल अंचल प्रशासन और स्थानीय रैयतों की मौजूदगी में जमीन की मापी कर सीमांकन किया गया था। सड़क किनारे की भूमि रैयती है, जिस पर फ्लैट निर्माण हो रहा है। उसके पीछे सरकारी भूमि और उसके बाद वन विभाग की जमीन व पहाड़ स्थित है।

अब यह सवाल खड़ा हो रहा है कि – क्या आशियाना प्रकृति के निर्माण कार्य में CNT-SPT एक्ट और वन संरक्षण नियमों का पालन किया गया है? क्या सभी सरकारी मंजूरियां वास्तव में ली गई हैं?

फिलहाल, पूड़ीसीली समेत पूरे चांडिल अंचल में सरकारी व सुरक्षित जमीनों पर अवैध कब्जे का मामला बड़ा सवाल बन गया है। लोग पूछ रहे हैं कि – क्या प्रशासन इन माफियाओं पर लगाम कस पाएगा या सरकारी जमीनों पर कब्जे का खेल यूं ही चलता रहेगा?

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