महास्नान के बाद अनासर काल शुरू, अब 14 जुलाई को होंगे महाप्रभु के दर्शन
खरसावां, 29 जून : हरिभंजा स्थित प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर में सोमवार को स्नान पूर्णिमा के अवसर पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, देवी सुभद्रा एवं सुदर्शन का पारंपरिक महास्नान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान सेवायतों ने महाप्रभु को रत्न सिंहासन से स्नान मंडप तक लाकर विधिवत हवन-पूजन कराया। इसके बाद शंखध्वनि, उलुध्वनि और “जय जगन्नाथ” के उद्घोष के बीच 108 कलशों के पवित्र जल से महास्नान कराया गया।
परंपरा के अनुसार भगवान जगन्नाथ को 35, बलभद्र को 42, सुभद्रा को 20 तथा सुदर्शन को 11 कलश जल से स्नान कराया गया। साथ ही चंदन, अगुरु, गाय का घी, दूध, दही, मधु और हल्दी का लेप भी अर्पित किया गया। इस दिव्य अनुष्ठान के साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में उमड़े। अनुष्ठान में पुरोहित प्रदीप कुमार दाश, भरत त्रिपाठी, जगन्नाथ त्रिपाठी और शचींद्र कुमार दाश सहित अनेक सेवायत उपस्थित रहे।
महास्नान के साथ ही महाप्रभु का अनासर काल प्रारंभ हो गया। धार्मिक मान्यता के अनुसार अत्यधिक स्नान के बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं और 15 दिनों तक अणवसर गृह में रहकर औषधीय उपचार ग्रहण करते हैं। इस अवधि में भक्तों को दर्शन नहीं होंगे। 14 जुलाई को नेत्रोत्सव के अवसर पर भगवान नवयौवन स्वरूप में दर्शन देंगे, जबकि 16 जुलाई को भव्य रथयात्रा में मौसीबाड़ी (गुंडिचा मंदिर) के लिए प्रस्थान करेंगे।