जनगणना में सही पहचान दर्ज कराना अधिकार और अस्तित्व की लड़ाई : अजीत प्रसाद महतो 

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चांडिल, 10 मई : चांडिल प्रखंड के डोबो स्थित जितेन महतो ढ़िड़ा (कुड़मि-भवन) में रविवार को आदिवासी कुड़मि समाज का प्रतिनिधि सम्मेलन आयोजित हुआ। सम्मेलन की अध्यक्षता केंद्रीय अध्यक्ष शशांक शेखर महतो ने की। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2026-27 की जनगणना में कुड़मि समाज की सही जातीय एवं भाषाई पहचान सुनिश्चित करना था। सम्मेलन में समाज के विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रतिनिधियों ने एक स्वर में कहा कि अब समय आ गया है कि कुड़मि समाज अपनी पहचान, भाषा और अधिकार को लेकर पूरी मजबूती के साथ संगठित हो।

इस अवसर पर समाज के संयोजक मुलखुंटि मूलमानता अजीत प्रसाद महतो ने आंदोलनात्मक स्वर में कहा कि पहचान ही अस्तित्व है, और अस्तित्व ही अधिकार की पहली शर्त है। उन्होंने आह्वान किया कि जनगणना में अपनी जाति “कुड़मि” तथा भाषा “कुड़मालि” ही स्पष्ट रूप से दर्ज कराएं। उन्होंने कहा कि यही हमारी असली पहचान, हमारा इतिहास और हमारी सांस्कृतिक विरासत है। अजीत प्रसाद महतो ने कहा कि वर्षों से सरकारी अभिलेखों और खतियानों में कुड़मि जनजाति शब्द को विभिन्न तरीकों से तोड़-मरोड़ कर लिखने का काम किया गया। जिससे समाज के आदिवासी पहचान को कमजोर करने की कोशिश हुई। यह केवल प्रशासनिक भूल नहीं, बल्कि हमारी ऐतिहासिक पहचान को मिटाने की एक सुनियोजित प्रक्रिया रही है।

उन्होंने कहा कि अब कुड़मि समाज को भावनात्मक नहीं बल्कि दस्तावेजी लड़ाई लड़नी होगी। जनगणना ही वह सबसे बड़ा लोकतांत्रिक हथियार है, जिसके माध्यम से समाज अपनी वास्तविक जनसंख्या, भाषा और अस्तित्व को देश के सामने स्थापित कर सकता है। मौके पर केंद्रीय प्रवक्ता अधिवक्ता सुनील कुमार गुलिआर ने कहा कि बंगाल चुनाव के दौरान देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कुड़मालि भाषा को संविधान के आठवीं अनुसूची में शामिल करने का आश्वासन दिया था। समाज ने समर्थन देकर सरकार बनाने में अपनी भूमिका निभाई, अब सरकार की जिम्मेदारी है कि वह अपने वादे को पूरा करें।

सम्मेलन में यह भी स्पष्ट किया गया कि कुड़मि समाज की अगली और सबसे बड़ी लड़ाई सरकारी दस्तावेजों में अनुसूचित जनजाति की वास्तविक पहचान और अधिकार प्राप्त करने की होगी। मौके पर केंद्रीय उपाध्यक्ष छोटेलाल मुतरुआर, ओमिय महतो, दलगोविंद महन्त, केंद्रीय सह-सचिन जयराम हिन्दइआर, रास बिहारी महतो, दीपक पुनअरिआर, संजीव महंत, बसंत महंत, पद्मलोचन महतो, केंद्रीय महिला संयोजिका डॉ० कोनिका माहातो, अशोक पुनअरिआर, गुणधाम मुतरुआर आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे।

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