2029 से पहले कुड़मी नेतृत्व की नई सियासी दस्तक, गौतम महतो ने उठाया मुख्यमंत्री के चेहरे का मुद्दा
सरायकेला, 02 सितंबर : झारखंड की सियासत में 2029 के विधानसभा चुनाव की आहट के साथ सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज होने लगी हैं। इसी बीच कोल्हान के युवा नेता एवं कुड़मी समाज से जुड़े गौतम महतो ने मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर ऐसी मांग उठा दी है, जिसने राज्य की राजनीति में नई बहस को जन्म दे दिया है।
सोशल मीडिया पर जारी अपने एक पोस्ट में गौतम महतो ने राजनीतिक दलों से आगामी विधानसभा चुनाव में कुड़मी समाज को मुख्यमंत्री पद के लिए नेतृत्व देने की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया कि झारखंड के अलग राज्य बनने के 26 वर्षों बाद भी कुड़मी समाज को मुख्यमंत्री के पद पर प्रतिनिधित्व क्यों नहीं मिला।
महतो का कहना है कि झारखंड अलग राज्य के आंदोलन में कुड़मी समाज की भी महत्वपूर्ण भागीदारी रही है और समाज के लोगों ने आंदोलन में बलिदान दिया। इसके बावजूद सत्ता में हिस्सेदारी और शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व के स्तर पर समाज को वह स्थान नहीं मिल पाया, जिसकी अपेक्षा की जाती रही है।
उन्होंने अपने पोस्ट में कुड़मी समाज की आबादी करीब 22 प्रतिशत होने का दावा करते हुए कहा कि झामुमो, भाजपा और कांग्रेस सहित प्रमुख राजनीतिक दलों ने समाज को अपेक्षित राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं दिया है।
गौतम महतो ने 2029 के चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों के सामने स्पष्ट संदेश भी रखा है। उनका कहना है कि जो भी दल कुड़मी समाज के किसी नेता या कार्यकर्ता को मुख्यमंत्री के चेहरे के तौर पर आगे करेगा, उसे समाज का व्यापक समर्थन मिल सकता है।
महतो के इस बयान ने झारखंड की राजनीति में ‘कुड़मी मुख्यमंत्री’ के मुद्दे को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। अब देखना होगा कि 2029 के चुनाव से पहले प्रमुख राजनीतिक दल इस मांग को किस नजरिए से देखते हैं और क्या यह मुद्दा भविष्य के राजनीतिक गठबंधनों एवं नेतृत्व के समीकरणों को प्रभावित करता है।



