जनता प्यास से बेहाल, सत्ता के टैंकर मालामाल! आदित्यपुर में पानी पर ‘कब्जे’ का आरोप, डिप्टी मेयर और बिल्डर कनेक्शन पर उठे गंभीर सवाल

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जनता प्यास से बेहाल, सत्ता के टैंकर मालामाल! आदित्यपुर में पानी पर ‘कब्जे’ का आरोप, डिप्टी मेयर और बिल्डर कनेक्शन पर उठे गंभीर सवाल

आदित्यपुर, 25 मई : भीषण गर्मी में जब आदित्यपुर नगर निगम क्षेत्र की जनता बूंद-बूंद पानी के लिए तड़प रही है, तब सरकारी जलापूर्ति व्यवस्था से निजी सोसायटी तक पानी पहुंचाने के आरोपों ने पूरे शहर में आक्रोश की आग भड़का दी है। लोगों का कहना है कि यह सिर्फ अनियमितता नहीं, बल्कि जनता के हिस्से के पानी पर “सत्ता संरक्षित कब्जा” है।
मामला आरआईटी स्थित चावला मोड़ के समीप नगर निगम की जलापूर्ति पाइपलाइन से जुड़ा है, जहां से कथित तौर पर निजी टैंकरों के माध्यम से नवनिर्माण बिल्डर (NNB) की भगवती एन्क्लेव सोसायटी तक पानी पहुंचाया जा रहा है। इस पूरे विवाद में आदित्यपुर नगर निगम के डिप्टी मेयर अंकुर सिंह और उनके परिवार की कंपनी का नाम सामने आने के बाद लोगों में भारी नाराजगी है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, एक ओर नगर निगम क्षेत्र के कई वार्डों में कई दिनों से नियमित जलापूर्ति ठप है, वहीं दूसरी ओर 8000 और 12000 लीटर क्षमता वाले बड़े-बड़े टैंकर दिनभर में कई चक्कर लगाकर सरकारी पानी निजी सोसायटी तक पहुंचा रहे हैं। आरोप है कि जब आम लोग सूखी टंकियों और खाली बाल्टियों के बीच जीने को मजबूर हैं, तब रसूखदारों के फ्लैटों में पानी की निर्बाध सप्लाई जारी है।
लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर किस अधिकार से नगर निगम की पाइपलाइन से निजी बिल्डर को पानी दिया जा रहा है? क्या इसके लिए कोई आधिकारिक अनुमति है? यदि अनुमति है तो उसकी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही? और यदि अनुमति नहीं है तो क्या यह खुलेआम सरकारी संसाधनों की लूट नहीं है?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगर निगम की पहली जिम्मेदारी आम जनता को पानी उपलब्ध कराना है, न कि निजी बिल्डरों की सुविधा सुनिश्चित करना। जनता पूछ रही है कि क्या आदित्यपुर में अब पानी भी पहुंच और राजनीतिक ताकत देखकर बांटा जाएगा?
सबसे गंभीर सवाल हितों के टकराव को लेकर उठ रहे हैं। जिस व्यक्ति पर नगर निगम की व्यवस्था को निष्पक्ष रूप से चलाने की जिम्मेदारी है, उसी के परिवार की कंपनी पर नगर निगम के पानी के इस्तेमाल का आरोप लगना पूरे सिस्टम की साख पर सवाल खड़ा कर रहा है। लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही हैं तो यह नैतिकता और जवाबदेही दोनों की खुली धज्जियां हैं।
क्षेत्र में चर्चा इस बात की भी है कि यदि यही पानी प्रभावित मोहल्लों तक पहुंचाया जाता तो हजारों लोगों को राहत मिल सकती थी। लेकिन यहां तस्वीर उलटी दिख रही है। जनता लाइन में खड़ी है और टैंकर सीधे निजी सोसायटी में घुस रहे हैं।
लोगों ने इसे “पानी की चोरी” बताते हुए पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि जल संकट के बीच इस तरह की कथित विशेष सुविधा बंद नहीं हुई तो जनता सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेगी।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि राष्ट्रीय स्तर के एक समाचार पत्र में मामला प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद भी नगर निगम प्रशासन और डिप्टी मेयर की ओर से अब तक कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है। यह चुप्पी जनता के शक को और गहरा कर रही है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या नगर निगम जनता के प्यासे गलों की चिंता करेगा या फिर सरकारी पानी पर रसूखदारों का कब्जा यूं ही चलता रहेगा?

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