जंगली हाथियों के आतंक से त्रस्त ग्रामीणों ने कॉलेज मोड़ से वन विभाग कार्यालय तक पैदल मार्च कर जोरदार नारेबाजी की, प्रशासन को चेताया

चांडिल, 08 सितंबर : सरायकेला-खरसावां जिले के नीमडीह, चांडिल, ईचागढ़ और कुकड़ू प्रखंड के ग्रामीणों ने सोमवार को जंगली हाथियों के बढ़ते आतंक के खिलाफ जोरदार आंदोलन किया। ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों की चपेट में आकर खेतों की फसल लगातार बर्बाद हो रही है, घर टूट रहे हैं और कई लोग घायल हो चुके हैं। इस पीड़ा को लेकर ग्रामीणों ने “जंगली हाथी भगाओ, किसानों की फसल बचाओ संघर्ष समिति” के बैनर तले चांडिल कॉलेज मोड़ से वन विभाग कार्यालय तक पैदल मार्च निकाला और नारेबाजी की।
वन विभाग कार्यालय पहुंचकर किसानों ने घेराव किया और वन विभाग वन क्षेत्र पदाधिकारी को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। उनकी प्रमुख मांगों में फसल बर्बादी पर प्रति एकड़ ₹1 लाख मुआवज़ा। हाथियों द्वारा तोड़े गए घरों की तत्काल भरपाई। मृतक किसानों के आश्रितों को ₹25 लाख और घायलों को ₹5 लाख सहायता। गांवों में स्थायी सुरक्षा उपाय—सायरन, सोलर लाइट और बचाव उपकरण की मांगें शामिल हैं। इसके अलावा खेती छोड़ चुके किसानों को प्रति एकड़ ₹30,000 वैकल्पिक मुआवज़ा देने की मांग की है।

आंदोलन में झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) पार्टी के केंद्रीय उपाध्यक्ष सह पूर्व विधायक प्रत्याशी तरुण महतो भी शामिल हुए। उन्होंने मौके पर आकर किसानों का समर्थन किया और वन विभाग के अधिकारियों से वार्ता की। तरुण महतो ने सवाल उठाया कि “बंगाल में हाथियों के निराकरण के लिए विशेष सुविधाएँ उपलब्ध हैं, लेकिन झारखंड में ऐसा क्यों नहीं? यहां प्रखंड स्तर पर प्रशिक्षण और सुरक्षा उपाय क्यों नहीं किए जा रहे?”
उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि JLKM पार्टी उनकी लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है और अगर जल्द समाधान नहीं हुआ तो यह मुद्दा सदन तक ले जाया जाएगा।
आंदोलन में बड़ी संख्या में महिला और पुरुष शामिल हुए। ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।



