नीमडीह – चांडिल – तिरुलडीह में बंद लेकिन ईचागढ़ में धड़ल्ले से चल रहा अवैध बालू कारोबार, पुलिस बनी मूकदर्शक

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नीमडीह – चांडिल – तिरुलडीह में बंद लेकिन ईचागढ़ में धड़ल्ले से चल रहा अवैध बालू कारोबार, पुलिस बनी मूकदर्शक

सरायकेला/चांडिल : जिले के तिरुलडीह, नीमडीह और चांडिल थाना क्षेत्र में विगत दो माह से जिला खनन पदाधिकारी व स्थानीय पुलिस की सक्रियता से बालू खनन और परिवहन पर सख्त रोक लगी हुई है। इन क्षेत्रों में हाइवा वाहनों से अवैध बालू परिवहन लगभग बंद हो चुका है। छोटे स्तर पर ट्रैक्टर, 407 वैन और पिकअप से चोरी-छिपे बालू ढोने की सूचनाएँ भले आती रहती हों, लेकिन बड़े पैमाने पर हाइवा से बालू ले जाने पर लगभग पूरी तरह लगाम कस दी गई है।

लेकिन यही सख्ती ईचागढ़ थाना क्षेत्र में नदारद है। ईचागढ़ में अवैध बालू खनन और परिवहन बेखौफ होकर जारी है। स्थिति यह है कि थाना परिसर के सामने से ही रातभर सैकड़ों हाइवा बालू लेकर गुजरते हैं और पुलिस तमाशबीन बनी रहती है। स्थानीय लोग आरोप लगाते हैं कि पुलिस की मौन सहमति और खनन माफियाओं से मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी पैमाने पर अवैध कारोबार संभव ही नहीं है।

पुलिस जब भी इस पर सवालों के घेरे में आती है तो JSMDC के वैध चालान और स्टॉक यार्ड का बहाना देकर अपना पल्ला झाड़ लेती है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या सभी हाइवा वाहनों में वास्तव में वैध चालान होता है? यदि चालान है तो क्या वाहनों में चालान के अनुसार ही बालू लदा रहता है, या फिर ओवरलोडिंग कर राजस्व चोरी और सड़क सुरक्षा दोनों से खिलवाड़ किया जाता है?

ईचागढ़ में धड़ल्ले से जारी यह गोरखधंधा प्रशासन और जिला खनन विभाग की सक्रियता पर भी सवाल खड़ा करता है। आखिर क्यों अन्य थाना क्षेत्रों में कार्रवाई संभव है, लेकिन ईचागढ़ में अवैध कारोबारियों के हौसले इतने बुलंद हैं? क्या ईचागढ़ पुलिस की चुप्पी इसके पीछे किसी बड़े खेल की ओर इशारा करती है?

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