चांडिल : हाईवे पर सड़क व सुविधाएं अधूरी, लेकिन टोल टैक्स वसूली पूरी

चांडिल, 24 अगस्त : चांडिल अनुमंडल क्षेत्र स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग 32 और 33 पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा लगाए गए टोल प्लाजा में वसूली तो पूरी की जा रही हैं, लेकिन वाहन चालक और यात्रियों के लिए सुविधा और व्यवस्था के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। दोनों टोल प्लाजा के एक से दो किलोमीटर दूर सड़क अधूरी है, यहां रोजना सड़क जाम जैसी स्थिति बनी रहती है, जिसका खामियाजा वाहनों में सफश्र कर रहे यात्री, मालवाहक वाहन चालक और जरूरी कामों से आवागमन करने वाले लोगों को भुगतना पड़ रहा है। सबकुछ एनएचएआई के आंखों के सामने हो रहा है, लेकिन विभाग ने आमजनों के हित में ना इसकी कोई संज्ञान लिया और ना स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने इस मामले को गंभीरता से लिया।

चार दिनों से जाम जैसी स्थिति
टाटा-रांची राष्ट्रीय राजमार्ग अति व्यस्तम सड़क मार्गों में से एक है, जिससे होकर प्रतिदिन हजारों यात्रियों समेत कई वीवीआईपी सफर करते हैं। इस नेशनल हाईवे को दुर्घटना रहित और जाम मुक्त बनाने के उद्देश्य से चौड़ीकरण करते हुए फोरलेन बनवाई गई है। उक्त सड़क का निर्माण कार्य चांडिल गोलचक्कर के सामने अबतक जारी है। देश के प्रधानमंत्री ने इस सड़क का उदघाटन पहले ही कर दिया है और इस सड़क पर टोल टैक्स की वसूली भी जारी है। जिस स्थान पर सड़क निर्माणाधीन है, वहां प्रतिदिन जाम जैसी स्थिति बनी रहती है। रोज लगभग दो किलाेमीटर तक वाहनों की कतार लगी रहती है। दो किलोमीटर का सफर तय करने में कभी-कीज्ञी वाहन चालकों को एक घेटे का भी समय लग जाता है। उल्लेखनीय यह है कि निर्माणाधीन सड़क टोल प्लाज से एक किलोमीटर के दायरे में है।
इस जाम का सबसे गंभीर असर एम्बुलेंस और अन्य आवश्यक सेवाओं पर पड़ रहा है। कई बार मरीजों और आपातकालीन वाहनों को भी घंटों इंतजार करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि टोल टैक्स देने के बावजूद यात्रियों को बदहाल और अधूरी सड़क पर सफर करना पड़ रहा है, जो बेहद शर्मनाक है। यहां एनएचएआई की लापरवाही साफ झलक रही है। न तो अधूरे मार्ग का निर्माण कार्य पूरा किया गया है और न ही सिंगल मार्ग की मरम्मत कराई गई है। नतीजा यह है कि वाहन चालक मजबूरी में खस्ताहाल सड़कों पर चलने और घंटों जाम में फंसने को विवश हैं। लोगों का कहना है कि जब वाहन मालिक और संचालक रोड टैक्स, टोल टैक्स, इनकम टैक्स समेत तमाम करों का भुगतान करते हैं, तो बदले में उन्हें सुगम और सुरक्षित सड़क क्यों नहीं मिल रही। सवाल यह भी उठता है कि जब सड़क अधूरी और जर्जर है तो टोल वसूली का औचित्य क्या है।



