एनएचएआई की लापरवाही : चौका ओवरब्रिज पर कार और बोलेरो डिवाइडर पर चढ़ी, संयोग से बचे यात्री

चांडिल, 21 अगस्त : बुधवार रात हुई भारी बारिश ने एक बार फिर एनएचएआई की लापरवाही को उजागर कर दिया। सरायकेला-खरसावां जिले के चौका थाना क्षेत्र अंतर्गत चौका ओवरब्रिज पर टाटा-रांची फोरलेन पर कुछ समय के अंतराल पर एक कार और एक बोलेरो अनियंत्रित होकर सीधे डिवाइडर पर चढ़ गई। संयोगवश वाहन सवार सभी यात्री बाल-बाल बच गए, अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। कार सवार धनबाद से रांची जा रहे थे, जिसमें चालक के अलावा एक महिला और एक बच्ची थी। वहीं बोलेरो सवार चांडिल की ओर से ईचागढ़ जा रहे थे।

दो लोगों की हो चुकी है मौत
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। फोरलेन सड़क पर आए दिन ऐसी दुर्घटनाएँ होती रहती हैं, लेकिन इसके बावजूद एनएचएआई और टोल रोड संचालक की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे। सड़क पर ओवर ब्रिज और सर्विस रोड प्रारंभ होने की सूचना का बोर्ड भी नहीं लगा है। इस स्थान पर पर्याप्त लाइट और किसी प्रकार का सुरक्षा सूचना वाला बोर्ड भी नहीं लगा है। स्थानीय लोगों के अनुसार इसी स्थान पर हुई दुर्घटना में अब तक दो लोगों की मृत्यु भी हो चुकी है। वाबजूद इसके सड़क पर किसी प्रकार की कोई सुरक्षात्मक व्यवस्था नहीं की गई है ,लोगों ने बताया कि सड़क पर चलने वाले वाहनों के गति नियंत्रण के लिए अवरोध भी नहीं लगाए गए है। जिसका नतीजा है कि सर्विस रोड पर भी तेज रफ्तार से भारी मालवाहक वाहन भी गुजरते हैं जिससे दुर्घटना की संभावना बनी रहती है।
सड़क सुरक्षा के नाम पर मज़ाक
टाटा-रांची टोल रोड पर सड़क सुरक्षा के नाम पर केवल कागज़ी दावे किए जाते हैं। सड़क किनारे बने कई यात्री पड़ाव और मुख्य स्थानों पर स्ट्रीट लाइटें रोड़ के उद्घाटन के समय से ही बंद पड़ी हैं। रात के अंधेरे में यह मार्ग ‘मौत का रास्ता’ साबित हो रहा है।
लंबी दूरी के चालकों के लिए कोई सुविधा नहीं
टोल रोड पर लंबी दूरी के वाहन चालकों के लिए जगह-जगह विश्राम स्थल एवं सुविधा केंद्र तो बनाया गया है, लेकिन वहां पर सुविधाएं नगण्य है। थकान की वजह से चालक अनियंत्रित हो जाते हैं और हादसे बढ़ रहे हैं। यात्रियों को पेयजल तक की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है। सवाल उठता है कि जब टोल टैक्स वसूला ही जा रहा है, तो फिर यात्रियों और चालकों को सुविधाएँ क्यों नहीं दी जा रही हैं?
नितिन गडकरी की “मॉडल रोड” का सच
केंद्रीय राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी बार-बार दावा करते हैं कि देश की टोल रोड ‘विश्वस्तरीय’ हैं। लेकिन टाटा-रांची फोरलेन पर हालात किसी से छिपे नहीं हैं। खस्ताहाल प्रबंधन, सुरक्षा मानकों की धज्जियाँ और सुविधाओं का घोर अभाव – यही है टोल रोड का असली चेहरा।
स्थानीय लोग पूछ रहे हैं – क्या यही है नितिन गडकरी की टोल रोड वाली सड़कें, जहाँ यात्रियों की सुरक्षा भगवान भरोसे छोड़ दी जाती है?



