आदिवासी मुख्यमंत्री के राज में आदिवासी भूमि पर कब्जा: आसनबनी में जांताल पूजा स्थल पर हमला

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आदिवासी मुख्यमंत्री के राज में आदिवासी भूमि पर कब्जा: आसनबनी में जांताल पूजा स्थल पर हमला

चांडिल, 17 अगस्त : सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल अंचल के आसनबनी स्थित पारंपरिक जांताल पूजा स्थल और आदिवासी समुदाय की रैयती भूमि पर फिर एक बार भूमाफियाओं द्वारा कब्जे का प्रयास किया जा रहा है। रविवार को भारी संख्या में स्थानीय भूमाफिया और जमशेदपुर के बिल्डर जेसीबी मशीन लेकर पहुंचे और भूमि का अवैध समतलीकरण कार्य शुरू कर दिया।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि भूमाफिया और बिल्डर गिरोह सत्ता पक्ष के संरक्षण में खुलेआम जमीन हड़पने की साजिश रच रहे हैं। उनका आरोप है कि यदि कोई विरोध करता है, तो उसके साथ मारपीट की जाती है और झूठे मुकदमों में फंसा दिया जाता है।

पारंपरिक लाया (पुजारी) भूषण पहाड़िया ने बताया कि जिस जमीन पर कब्जा किया जा रहा है, वह उनकी रैयती भूमि है, जिसका मालिकाना हक अदालत ने वर्ष 1964-65 के सर्वे-सेटलमेंट मुकदमे में उनके परिवार को दिया था। बावजूद इसके फर्जी कागजात के जरिए भूमाफियाओं ने बार-बार इस भूमि की खरीद-बिक्री कर कब्जे की साजिश रची है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन पूरी तरह मौन है और रविवार को सरकारी दफ्तर बंद रहने का फायदा उठाकर जेसीबी से समतलीकरण किया जा रहा है।

 

भूषण पहाड़िया ने स्पष्ट कहा – “यह सिर्फ हमारी जमीन पर हमला नहीं है, बल्कि हमारी परंपरा, संस्कृति और आस्था पर सीधा आक्रमण है। प्रशासन की चुप्पी साबित करती है कि सत्ता के दबाव में न्याय को दबाया जा रहा है।”

मुख्यमंत्री की साख पर बट्टा

इस पूरे प्रकरण ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब राज्य का नेतृत्व स्वयं एक आदिवासी नेता और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कर रहे हैं, तब भी यदि आदिवासी समुदाय की जमीन और धार्मिक स्थल को भूमाफिया हड़प रहे हैं, तो यह उनकी साख पर सीधा धब्बा है। जनजातीय समुदाय के लोग कहते हैं कि हेमंत सोरेन हमेशा आदिवासियों की जल-जंगल-जमीन की रक्षा की बात करते हैं, लेकिन उनके ही कार्यकाल में भूमाफिया खुलेआम आदिवासियों की जमीन पर बुलडोजर चलवा रहे हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि यदि तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो यह आंदोलन का रूप लेगा। लोगों का कहना है कि सरकार अगर चुप रही तो इसे आदिवासी समाज के विश्वासघात के रूप में देखा जाएगा।

स्पष्ट संदेश यही है कि आसनबनी के भूमाफिया न केवल आदिवासी आस्था को रौंद रहे हैं, बल्कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की विश्वसनीयता और आदिवासी हितैषी छवि को भी खुली चुनौती दे रहे हैं।

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