गुरुजी के निधन से राजनीतिक जगत को अपूरणीय क्षति : हरे लाल महतो

चांडिल, 04 अगस्त : झारखंड आंदोलन के पुरोधा और झामुमो संस्थापक दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन पर झारखंड की राजनीति और समाज में शोक की लहर दौड़ गई है। आजसू पार्टी के केंद्रीय महासचिव हरे लाल महतो ने इस दुखद अवसर पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि शिबू सोरेन का जाना केवल झारखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के राजनीतिक जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई निकट भविष्य में संभव नहीं है।
हर वर्ग के हक की लड़ाई लड़ने वाले नेता थे गुरुजी
हरे लाल महतो ने कहा कि दिशोम गुरु ने न केवल आदिवासी समुदाय के अधिकारों के लिए संघर्ष किया, बल्कि राज्य के हर दबे-कुचले, शोषित और वंचित वर्ग की आवाज भी बने। वे ऐसे जननेता थे, जिन्होंने अपनी राजनीतिक पहचान को जनआंदोलन की भावना से जोड़ा और झारखंड को अलग राज्य का दर्जा दिलाने के संघर्ष को नेतृत्व प्रदान किया।
पूर्व आंदोलनकारी नेता हरे लाल महतो ने 90 के दशक की स्मृतियों को साझा करते हुए कहा कि जब झारखंड आंदोलन अपने चरम पर था, तब शिबू सोरेन अक्सर कोल्हान क्षेत्र में आया करते थे। उन्होंने कहा, “मुझे आज भी याद है, जब गुरुजी गांव-गांव जाकर लोगों को आंदोलन के प्रति जागरूक करते थे, उन्हें उनके हक और अधिकारों के लिए खड़ा होना सिखाते थे। उनका भाषण लोगों के दिलों में जोश भर देता था।”
स्वयं झारखंड आंदोलनकारी रहे हरे लाल महतो ने दिशोम गुरु को झारखंड आंदोलन को दिशा और धार देने वाला सबसे प्रभावशाली नेताओं में अग्रणी बताया। उन्होंने कहा कि गुरुजी ने कभी भी सत्ता या पद को प्राथमिकता नहीं दी, बल्कि जनता के हितों को ही अपना ध्येय बनाया। उनका जीवन संघर्षों, सिद्धांतों और सामाजिक न्याय के प्रति समर्पण का जीवंत उदाहरण रहा है।
शोक की घड़ी में श्रद्धांजलि
अंत में हरे लाल महतो ने ईश्वर से प्रार्थना की कि वह दिवंगत नेता की आत्मा को शांति प्रदान करें और झारखंड की जनता को यह अपार दुख सहने की शक्ति दें। उन्होंने कहा कि झारखंड की माटी ने एक महान सपूत खो दिया है, लेकिन उनकी विचारधारा और संघर्ष की विरासत हमेशा जीवित रहेगी।



