चांडिल : भुइयांडीह में जमीन विवाद ने लिया हिंसक रूप, रांची लोकसभा के पूर्व प्रत्याशी प्रबीन चंद्र महतो पर जानलेवा हमला

पूर्व जिला परिषद ओम प्रकाश लायेक पर आरोपों की झड़ी
चांडिल, 04 अगस्त : सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल थाना क्षेत्र अंतर्गत भुइयांडीह गांव एक बार फिर हिंसक टकराव का गवाह बना, जब सोमवार सुबह रांची लोकसभा के पूर्व प्रत्याशी एवं सामाजिक कार्यकर्ता प्रबीन चंद्र महतो पर जानलेवा हमला किया गया। हमले का आरोप सीधे तौर पर गांव के संतोष लायेक, चंद्रकांत लायेक एवं मंगल लायेक पर लगाया गया है। घटना उस वक्त घटी जब प्रबीन महतो अपने आवास से चांडिल स्थित एलआईसी कार्यालय के लिए निकले थे। वह एलआईसी अभिकर्ता भी हैं।
घटना को लेकर चांडिल थाना को दिए गए लिखित आवेदन में प्रबीन महतो ने न केवल हमलावरों पर गंभीर आरोप लगाए हैं, बल्कि हमले को एक गहरी साजिश का हिस्सा बताया है। उन्होंने दावा किया है कि इस साजिश के पीछे पूर्व जिला परिषद सदस्य ओम प्रकाश लायेक की मुख्य भूमिका है। उन्होंने कहा कि ओम प्रकाश लायेक वर्षों से इलाके में अवैध जमीन कारोबार का सरगना बना हुआ है और जो कोई भी उसके खिलाफ आवाज उठाता है, उसे डराया-धमकाया जाता है या उस पर हमला करवाया जाता है।
प्रबीन महतो ने यह भी आरोप लगाया कि ओम प्रकाश लायेक के संरक्षण में सीएनटी-एसपीटी एक्ट का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। भुइयांडीह समेत आसपास के क्षेत्रों में आदिवासी और दलित समुदाय की पुश्तैनी जमीनें अवैध रूप से हथियाई जा रही हैं। सरकारी जमीनों पर भी कब्जा जमाया जा रहा है। प्रबीन महतो ने यह भी कहा कि जब कोई सामाजिक कार्यकर्ता या जन प्रतिनिधि इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठाता है तो उसके साथ भी हिंसा और धमकी का सिलसिला शुरू हो जाता है।
हमले के दौरान बीच-बचाव में आई महिला पद्मावती महतो के साथ भी बदसलूकी और मारपीट की गई। प्रबीन महतो ने बताया कि 2014 और 2016 में भी उनके ऊपर रात्रि में घर में घुसकर हमला किया गया था, जिसका अब उन्हें स्पष्ट कारण समझ में आ रहा है। वे मानते हैं कि पूर्व के हमलों में भी यही तत्व शामिल रहे होंगे।
इससे पहले भी भुइयांडीह निवासी खुकी लायेक ने ओम प्रकाश लायेक और उसके साथियों के विरुद्ध पुश्तैनी जमीन पर अवैध दखल और धमकी के आरोप लगाते हुए उपायुक्त से शिकायत की थी। उपायुक्त द्वारा मामले में चांडिल पुलिस को हस्तक्षेप का निर्देश दिया गया था, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि प्रशासनिक कार्रवाई या तो धीमी रही या प्रभावहीन साबित हुई।
ओम प्रकाश लायेक — जमीन माफिया के आरोपों के घेरे में
ओम प्रकाश लायेक का नाम लंबे समय से विवादों में रहा है। एक समय जिला परिषद सदस्य रह चुके लायेक पर अब गंभीर आरोपों की फेहरिस्त बढ़ती जा रही है। इलाके में अवैध जमीन कारोबार, गरीबों की जमीन हथियाने, सरकारी जमीनों पर कब्जा जमाने, और विरोधियों पर हिंसक हमलों की साजिश जैसे संगीन आरोप उन्हें सीधे तौर पर “जमीन माफिया” की श्रेणी में ला खड़ा करते हैं।
प्रबीन महतो की मांग : जमीन माफियाओं पर हो कड़ी कार्रवाई
प्रबीन महतो ने जिला प्रशासन और पुलिस से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो भुइयांडीह जैसे गांवों में कानून का राज खत्म हो जाएगा और गरीबों की जमीनें पूरी तरह माफियाओं के कब्जे में चली जाएंगी।
भुइयांडीह की घटना सिर्फ एक व्यक्ति पर हमला नहीं है, बल्कि यह उस व्यापक सामाजिक संघर्ष की बानगी है, जिसमें भूमिहीन, दलित और आदिवासी समुदाय अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। अगर समय रहते प्रशासन ने आंखें नहीं खोलीं, तो यह संघर्ष और उग्र रूप ले सकता है। ओम प्रकाश लायेक जैसे प्रभावशाली तत्वों के खिलाफ निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई आज वक्त की सबसे बड़ी जरूरत है।



