छात्राओं की तबीयत बिगड़ने पर मचा हड़कंप, शिक्षक की सज़ा या फूड पॉइजनिंग

कारणों की हो रही जांच, और एक छात्रा की तबीयत बिगड़ी
जमशेदपुर/पटमदा, 29 जुलाई : पटमदा के बांगुड़दा स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय में सोमवार को हुई एक अप्रत्याशित घटना के बाद छात्राओं की तबीयत बिगड़ने से हड़कंप मच गया। प्रारंभिक तौर पर इसे शिक्षक द्वारा दी गई शारीरिक सज़ा से जोड़कर देखा गया, लेकिन सामने आ रही जानकारी ने मामले को नया मोड़ दे दिया है।
विद्यालय की वॉर्डन सह प्राचार्या रजनी मुर्मू ने स्पष्ट किया कि छात्राओं को उठक-बैठक की सज़ा दी गई थी, किंतु “200 बार” वाली बात पूरी तरह गलत है और भ्रामक तरीके से प्रचारित की गई है। उन्होंने बताया कि रविवार को कई छात्राओं के अभिभावक आए थे और घर से लड्डू व अन्य खाद्य सामग्री देकर गए थे, जिसके बाद सोमवार को उल्टी और कमजोरी की शिकायतें आने लगीं। पटमदा सीएचसी से भी इसे संभावित फूड प्वाइजनिंग का मामला बताया गया है।
सोमवार को जब चार छात्राओं की तबीयत अचानक बिगड़ी, तो उन्हें पहले पटमदा सीएचसी में प्राथमिक उपचार दिया गया और फिर बेहोशी की हालत में एमजीएम अस्पताल के आपातकालीन विभाग में भर्ती कराया गया। छात्राओं में लोवाडीह की अष्टमी महतो और दयावती प्रमाणिक, कुमीर की प्रियंका महतो और गेरुवाला की पूर्णिमा महतो शामिल थीं। मंगलवार को हालत सामान्य होने के बाद सभी को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और वे अपने घर लौट गईं।
इसी बीच, मंगलवार को हुरूम्बिल गांव की एक और छात्रा मोहिता महतो को तबीयत बिगड़ने पर माचा सीएचसी ले जाया गया, जहां से प्राथमिक उपचार के बाद उसे भी एमजीएम अस्पताल रेफर किया गया। लेकिन सरकारी एम्बुलेंस के खराब होने और 108 एम्बुलेंस सेवा के हड़ताल पर होने के कारण उसे निजी वाहन से अस्पताल ले जाना पड़ा। दो अन्य छात्राओं को वायरल बुखार की शिकायत पर स्थानीय सीएचसी में इलाज के बाद छोड़ दिया गया।
घटना के बाद मामला तूल पकड़ता देख जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) मनोज कुमार के निर्देश पर पटमदा के बीईईओ प्रभाकर कुमार ने विद्यालय पहुंचकर जांच की। उन्होंने वॉर्डन रजनी मुर्मू, आरोपी शिक्षिका रजनी गुड़िया, रसोइयों और अन्य कर्मचारियों से पूछताछ की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं न हों, इसके लिए कड़े कदम उठाए जाएं। विद्यालय परिसर की सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश भी दिए गए। जांच के क्रम में वार्डन को शोकॉज नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है।
घटना के बाद “Manbhum Updates” न्यूज पोर्टल पर खबर प्रकाशित होते ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मच गई। जुगसलाई विधायक मंगल कालिंदी स्वयं एमजीएम अस्पताल पहुंचे और अधीक्षक डॉ. आरके मंधान से छात्राओं के बेहतर इलाज की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने बीमार छात्राओं और उनके परिजनों से भी मुलाकात की।
जहां एक ओर यह मामला अनुशासनात्मक कार्रवाई से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है, वहीं फूड प्वाइजनिंग की संभावना भी बराबरी से खड़ी है। फिलहाल विभागीय जांच जारी है और आगामी रिपोर्ट से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि छात्राओं की तबीयत खराब होने के पीछे असली वजह क्या थी।



