ग्रामीणों ने विक्षिप्त व्यक्ति को लोहे की जंजीरों में बांध कर छोड़ा, PLV की पहल पर मिला राहत का भरोसा

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ग्रामीणों ने विक्षिप्त व्यक्ति को लोहे की जंजीरों में बांध कर छोड़ा, PLV की पहल पर मिला राहत का भरोसा

ईचागढ़ प्रखंड के काटघोड़ा गांव की घटना, पंचायत भवन में किया गया विक्षिप्त को सुपुर्द

ईचागढ़, 19 जुलाई : ईचागढ़ थाना अंतर्गत काटघोड़ा गांव से एक अत्यंत अमानवीय घटना सामने आई है, जहां एक मानसिक रूप से विक्षिप्त युवक विनोद मांझी (पिता – रेपो मांझी) को गांव के कुछ लोगों द्वारा लोहे के सिकल (जंजीर) से हाथ और पैर बांधकर छोड़ दिया गया है।

इस घटना की सूचना ग्रामीणों ने PLV (पैरा लीगल वॉलंटियर) कार्तिक गोप को दी। सूचना मिलते ही वे तत्काल मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद पंचायत भवन पातकुम में एकत्र हुए ग्रामीणों, ग्राम प्रधान एवं स्थानीय प्रशासन के समक्ष मामले को रखा गया।

ईचागढ़ थाना प्रभारी की उपस्थिति में पंचायत के मुखिया राखहरी सिंह मुंडा को विक्षिप्त व्यक्ति की जिम्मेदारी सौंप दी गई। ग्रामीणों ने PLV कार्तिक गोप से अनुरोध किया कि उक्त मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति को बेहतर इलाज के लिए कांके (रांची) स्थित मानसिक आरोग्यशाला में भर्ती कराया जाए।

इस पर PLV कार्तिक गोप ने ग्रामीणों को समझाते हुए कहा कि यदि वे किसी एक ग्रामीण को उनके साथ भेजें, तो वे सिविल कोर्ट के सचिव से मिलकर उचित प्रक्रिया के तहत पीड़ित का इलाज सुनिश्चित करवा सकते हैं। उन्होंने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि मानसिक रूप से अस्वस्थ इस व्यक्ति को जल्द से जल्द सरकारी सहायता के माध्यम से इलाज दिलाने की कोशिश की जाएगी।

ग्रामीणों में था आक्रोश, साथ ही संवेदना

हालांकि कुछ लोगों ने विक्षिप्त व्यक्ति के व्यवहार से भय के कारण उसे बांधने की बात कही, लेकिन पूरे गांव में इस अमानवीय कृत्य को लेकर संवेदना भी देखने को मिली। लोग चाहते हैं कि उसे उचित इलाज मिले और वह सामान्य जीवन की ओर लौट सके।

मानवाधिकारों का उल्लंघन, प्रशासन को सख्ती दिखाने की जरूरत

इस घटना ने एक बार फिर मानसिक स्वास्थ्य को लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी और सरकारी तंत्र की धीमी प्रतिक्रिया को उजागर किया है। मानवाधिकारों की दृष्टि से किसी भी व्यक्ति को इस प्रकार लोहे की जंजीरों में बांधना निंदनीय और असंवैधानिक है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तत्परता से कार्रवाई करता है और पीड़ित को कितना राहत मिल पाता है।

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