चांडिल, 16 अप्रैल : सरायकेला-खरसावां जिले के कपाली नगर परिषद क्षेत्र में बिजली व्यवस्था को लेकर आयोजित बैठक महज एक औपचारिक समीक्षा तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने इलाके की जमीनी समस्याओं और योजनाओं के बीच के फासले को उजागर कर दिया। स्मार्ट मीटर लागू करने के प्रस्ताव ने जहां बिजली विभाग की प्राथमिकताओं को सामने रखा, वहीं जनप्रतिनिधियों ने बुनियादी ढांचे की खामियों को केंद्र में ला दिया।
बैठक में कार्यपालक अभियंता लालजी महतो ने स्मार्ट मीटर को पारदर्शिता और उपभोक्ता हित से जोड़ते हुए इसे जरूरी कदम बताया। उनका कहना था कि इससे बिजली खपत का सटीक आकलन होगा और बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी।
हालांकि, नगर परिषद अध्यक्ष परवेज़ आलम ने इस प्रस्ताव पर कड़ा एतराज जताते हुए साफ कहा कि जब तक कपाली में जर्जर तार, पुराने पोल और अनियमित आपूर्ति जैसी मूल समस्याएं दूर नहीं होतीं, तब तक स्मार्ट मीटर थोपना व्यवहारिक नहीं है।
बैठक में वार्ड पार्षदों ने जमीनी स्तर की तस्वीर पेश करते हुए बताया कि कई जगहों पर अब भी बिजली आपूर्ति बांस के सहारे चल रही है। ट्रांसफॉर्मरों की बार-बार खराबी और लगातार बिजली कटौती ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।
इस पर विभागीय अधिकारियों ने समस्याओं के समाधान का भरोसा तो दिया, लेकिन साथ ही तकनीकी प्रक्रियाओं का हवाला भी रखा। अधिकारियों के अनुसार, नए पोल और ट्रांसफॉर्मर लगाने से पहले स्थान चिन्हित करना आवश्यक है, ताकि भविष्य में विवाद की स्थिति न बने।
बढ़े हुए बिजली बिल के मुद्दे पर विभाग ने उपभोक्ताओं की आंतरिक वायरिंग को जिम्मेदार ठहराया, जबकि स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को नगर परिषद के दायरे में बताया गया।
बिद्युत विभाग के सहायक अभियंता कालीनाथ सिंह मुंडा ने बैठक में संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि विपरीत मौसम में बिजली कर्मी जोखिम उठाकर सेवा बहाल करते हैं, इसलिए उपभोक्ताओं का सहयोग भी उतना ही जरूरी है। उन्होंने लोगों से संयमित बिजली उपयोग की अपील की।
बैठक में कनीय अभियंता बलराम हांसदा समेत कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
इस बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया कि कपाली में बिजली व्यवस्था की चुनौती सिर्फ तकनीकी नहीं, बल्कि प्राथमिकताओं के संतुलन की भी है। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि क्या स्मार्ट मीटर से पहले बुनियादी ढांचा ‘स्मार्ट’ हो पाएगा, या फिर योजनाएं जमीनी हकीकत से कटकर ही आगे बढ़ती रहेंगी?