टाटा-रांची टोल रोड की बदहाली पर उठे सवाल, केंद्रीय मंत्री संजय सेठ से जवाब की उम्मीद – ‘अमेरिका जैसी सड़कें’ वाले दावों की खुल रही पोल

15 जुलाई, डेस्क रिपोर्ट : टाटा-रांची फोरलेन टोल रोड पर चलना इन दिनों जोखिम भरा हो गया है। करोड़ों की लागत से बने इस राष्ट्रीय राजमार्ग की स्थिति इतनी जर्जर हो चुकी है कि वाहन चालकों को रोज़ाना जान हथेली पर रखकर सफर करना पड़ रहा है। हालात ऐसे हो चुके हैं कि अब लोग सवाल उठा रहे हैं—जब टोल टैक्स अमेरिका जैसा लिया जा रहा है तो सड़कें कब अमेरिका जैसी बनेंगी?
बारिश में और भी खतरनाक हो गया है सफर
राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 33, जो झारखंड की राजधानी रांची को औद्योगिक नगरी जमशेदपुर से जोड़ता है, उसकी हालत बारिश में और भी खतरनाक हो चुकी है। सरायकेला-खरसावां जिले से होकर गुजरने वाले इस मार्ग पर एक किलोमीटर भी ऐसा नहीं दिखता, जहां सड़क समतल हो। जगह-जगह बने गड्ढे अब सड़क नहीं बल्कि मौत के कुंए जैसे नजर आते हैं।
वाहन चालकों का कहना है कि बारिश के कारण गड्ढों में पानी भर गया है और अब यह पहचानना मुश्किल हो गया है कि सड़क पर गड्ढा है या गड्ढे में सड़क।
दुर्घटनाएं बढ़ी, वाहन क्षतिग्रस्त
बदहाल सड़कों के कारण रोज़ाना दर्जनों वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। कभी कोई बाइक सवार गिर जाता है तो कभी ट्रक या बस पलटने/दुर्घटनाग्रस्त होने जैसी घटनाएं सामने आती हैं। टायर पंक्चर, शॉक एब्जॉर्बर और एक्सल टूटने की शिकायतें आम हो गई हैं। वाहन मालिकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, वहीं यात्रियों की जान भी जोखिम में पड़ रही है।
रोज़ाना लाखों की टोल वसूली, फिर भी सुविधाएं नदारद है। टाटा-रांची फोरलेन पर दो स्थानों—बुंडू और पाटा में टोल टैक्स वसूला जाता है। आंकड़े बताते हैं कि प्रतिदिन लाखों रुपए का टोल टैक्स वसूला जा रहा है। जिन वाहनों में फ़ास्ट टैग नहीं होते हैं, उन्हें दोगुना टैक्स भुगतान करना पड़ता है।
सवाल यह है कि इतनी बड़ी वसूली के बाद भी सड़क की मरम्मत या रखरखाव पर ध्यान क्यों नहीं दिया जाता? एनएचएआई के मापदंडों के अनुसार जहां टोल टैक्स वसूला जा रहा है, वहां बेहतर सड़क, सर्विस लेन, शौचालय, एंबुलेंस और सहायता केंद्र जैसी मूलभूत सुविधाएं होनी चाहिए। लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है।
‘अमेरिका जैसी सड़कें’ वाले दावों की खुल रही पोल
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी अक्सर दावा करते हैं कि भारत की सड़कें अब अमेरिका की सड़कों से तुलना करने लायक हो गई हैं। लेकिन टाटा-रांची रोड पर यात्रा करने वालों को यह दावा एक मजाक लगता है। वाहन मालिक कहते हैं, “टैक्स तो अमेरिका जैसा ले रहे हैं, सुविधाएं देना भूल गए हैं।”
प्रदर्शन, पौधारोपण और स्लैग से गड्ढे भरने की नौटंकी
कुछ महीनों पहले भाजपा युवा मोर्चा ने विरोध स्वरूप सड़क के गड्ढों में पौधारोपण कर विरोध दर्ज कराया था। इसके बाद एनएचएआई द्वारा गड्ढों को स्लैग डालकर अस्थायी रूप से भरा गया, जो बारिश में दोबारा उखड़ गए।
अधूरे निर्माण के बावजूद टोल वसूली जारी
यह तथ्य और भी चौंकाने वाला है कि तीन साल पहले उद्घाटन किए जाने के बावजूद अब भी इस टोल रोड का निर्माण कार्य अधूरा है। खासकर पाटा टोल प्लाजा के आसपास सड़क का काम अब भी जारी है। इससे रोज़ाना ट्रैफिक जाम की स्थिति बन रही है। इतना ही नहीं, कांची और चिलगु के पुल भी बंद कर दिए गए हैं, जिससे सिंगल लेन में आवागमन किया जा रहा है।
सवाल उठते हैं—जवाब कौन देगा?
यह सड़क क्षेत्र के सांसद और वर्तमान केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ के संसदीय क्षेत्र में आता है। ऐसे में आम जनता सवाल कर रही है—जब मंत्री केंद्र में हैं, तब भी उनके निर्वाचन क्षेत्र की यह दुर्दशा क्यों है? क्या इस टोल रोड पर उनकी नजर नहीं जाती? क्या जिम्मेदार एजेंसियों को जवाबदेह ठहराने की पहल नहीं की जानी चाहिए?
टाटा-रांची फोरलेन टोल रोड सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि सिस्टम की असफलता और आम जनता की उपेक्षा की जीवित मिसाल बन चुकी है। करोड़ों की वसूली, लेकिन सुविधाओं के नाम पर सिफर। अब वक्त आ गया है कि केंद्रीय मंत्री और एनएचएआई इस मसले पर गंभीरता से ध्यान दें और जनता को उसका हक दें—एक सुरक्षित, समतल और सुगम सड़क।
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